Monday, May 7, 2018

चुकंदर के औषधीय गुण-Health Benefits of Beetroot in Hindi,Beet juice Benefits

 
चुकंदर के औषधीय गुण-Health Benefits of Beetroot in Hindi,beetroot juice,beet juice benefits

गुणों से भरपूर- सोडियम पोटेशियम, फॉस्फोरस, क्लोरीन, आयोडीन, आयरन और अन्य महत्वपूर्ण विटामिन पाए जाते है इसे खाने से हिमोग्लोबिन बढ़ता है। हर्बल जानकार चुंकदर को कैंसर जैसे भयावह रोग से ग्रसित रोगी को खिलाने की सलाह देते हैं। इनका मानना है कि चुकंदर कैंसर नियंत्रण में काफी मददगार होता है, चुकंदर का सेवन अधिक उम्र वालों में भी ऊर्जा का संचार करता है। इसमें एंटीआक्सीडेंट पाए जाते हैं। जो हमेशा जवान बनाएं रखते हैं। 
आदिवासी हर्बल जानकार चुकंदर सेवन की सलाह गर्भवती महिलाओं को देते हैं। इनके अनुसार चुकंदर का सेवन महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान भी करना चाहिए। यह महिलाओं को ताकत प्रदान करता है और शरीर में रक्त की मात्रा तैयार करने में मददगार साबित होता है। चुकंदर में भरपूर मात्रा में लौह तत्व और फ़ोलिक एसिड पाए जाते हैं जो रक्त निर्माण के लिए मददगार होते हैं।

चुकंदर के औषधीय गुण

  • एनीमिया में चुकंदर का जूस मानव शरीर में खून बनाने की प्रक्रिया में उपयोगी होता है। आयरन की प्रचुरता के कारण यह लाल रक्त कोशिकाओं को सक्रिय और उनकी पुर्नरचना करता है। यह एनीमिया के उपचार में विशेष रूप से उपयोगी होता है। इसके सेवन से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।
  • त्वचा के लिए फायदेमंद- यदि आपको आलस महसूस हो रही हो या फिर थकान लगे तो चुकंदर का खा लीजिये। इसमें कार्बोहाइड्रेट होता है जो शरीर की एनर्जी बढाता है।सफेद चुकंदर को पानी में उबाल कर छान लें। यह पानी फोड़े, जलन और मुहांसों के लिए काफी उपयोगी होता है। खसरा और बुखार में भी त्वचा को साफ करने में इसका उपयोग किया जा सकता है। 
  • चुकन्दर में ’बिटिन‘ नामक तत्व पाया जाता है, जो शरीर में कैंसर तथा ट्यूमर बनने की संभावनाओं को नष्ट कर देता है तथा यह शरीर में रोगों से लड़ने की प्रतिरोधक क्षमता का विकास करता है।
  • चुकन्दर के नियमित सेवन से दूध पिलानेवाली स्त्रियों के दूध में वृद्धि होती है। चुकन्दर का
  • नियमित सलाद खाते रहने से पेशाब की जलन में फायदा होता है। पेशाब के साथ कैल्शियम का शरीर से निकलना बन्द हो जाता है।
  • कब्ज तथा बवासीर में चुकन्दर गुणकारी है। रोज इसके सेवन से कब्ज तथा बवासीर की तकलीफ नहीं रहती। एनीमिया (रक्ताल्पता) में एक कप चुकन्दर का रस दिन में ३ बार लें। सुबह शाम रोज १ कप चुकन्दर का रस सेवन करने से स्मरणशक्ति बढ़ती है। इससे दिमाग की गर्मी तथा मानसिक कमजोरी दूर होती है।
  • एक कप चुकन्दर के रस में एक चम्मच नीबू का रस मिलाकर पीने से पाचन क्रिया की अनियमितताएँ दूर होती हैं तथा उल्टी, दस्त, पेचिश, पीलिया में लाभ होता है। रोजाना सोने से पहले एक कप चुकन्दर का रस पीने से बवासीर में लाभ होता है। चुकन्दर के रस में एक चम्मच शहद मिलाकर प्रतिदिन सुबह खाली पेट पीने से गेस्ट्रिक अल्सर में फायदा होता है।
  • चुकन्दर के रस में गाजर तथा खीरे का रस मिलाकर सेवन करने से गुर्दे तथा गाल ब्लेडर की सफाई होती है। चुकन्दर का रस एक कप दिन में दो बार पीने से या १०० ग्राम चुकन्दर का नियमित सेवन करने से गुर्दे सम्बन्धी रोगों में फायदा होता है। 
  • चुकन्दर के रस में गाजर का रस तथा पपीता या संतरे का रस मिलाकर दिन में २ बार सेवन करने से उच्च रक्तचाप में लाभ होता है। स्त्रियों के गर्भाशय सम्बन्धी रोगों में चुकन्दर विशेष लाभकारी है। बार-बार गर्भपात होता है या कम मासिक आने में बी यह लाभदायक होता है। इसके लिये एक प्याला चुकन्दर का रस सुबह खाली पेट पीना चाहिए।
  • गर्भवती स्त्रियों को चुकन्दर, गाजर, टमाटर तथा सेव का रस मिलाकर पिलाने से उनके शरीर में विटामिन ए.सी.डी तथा लोहे की कमी नहीं हो पाती। यह रक्तशोधन करके शरीर को लाल सुर्ख बनाने में सहायता करता है।
  • दिल की बीमारियां- चुकंदर में नाइट्रेट नामक रसायन होता है जो रक्त के दबाव को काफी कम कर देता है और दिल की बीमारी के जोखिम को भी कम करता है। चुकंदर एनीमिया के उपचार में बहुत उपयोगी माना जाता है। 
  • यह शरीर में रक्त बनाने की प्रक्रिया में सहायक होता है। आयरन की प्रचुरता के कारण यह लाल रक्त कोशिकाओं को सक्रिय रखने की क्षमता को बढ़ा देता है। इसके सेवन से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता और घाव भरने की क्षमता भी बढ़ जाती है।
  • हाई ब्लड प्रेशर में- लंदन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने रोज चुकंदर का जूस पीने वाले मरीजों को अध्ययन में शामिल किया। उन्होंने रोज चुकंदर का मिक्स जूस [गाजर या सेब के साथ] पीने वाले मरीजों के हाई ब्लड प्रेशर में कमी पाई। अध्ययन के मुताबिक रोजाना केवल दो कप चुकंदर का मिक्स जूस पीने से ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है। हालांकि इसका ज्यादा सेवन घातक साबित हो सकता है।
  • कब्ज और बवासीर-चुकंदर का नियमित सेवन करेंगे, तो कब्ज की शिकायत नहीं होगी। बवासीर के रोगियों के लिए भी यह काफी फायदेमंद होता है। रात में सोने से पहले एक गिलास या आधा गिलास जूस दवा का काम करता है।
  • लोग जिम में जी तोड़ कर वर्कआउट करते हैं उन्हें खाने के साथ चुकंदर खाना चाहिए। इससे शरीर में एनर्जी बढती है और थकान दूर होती है। साथ ही अगर हाई बीपी हो गया हो तो इसे पीने से केवल 1 घंटे में शरीर नार्मल हो जाता है 
  • आदिवासी एसिडिटी होने पर चुकंदर के जूस के सेवन की सलाह देते हैं। चुकंदर न सिर्फ किडनी की सफाई में मदद करता है बल्कि यकृत को स्वस्थ बनाने में भी मदद करता है।
  • चुकंदर को एंटी एजिंग के लिए एक महत्वपूर्ण और कारगर फार्मुला माना गया है। यह शारीरिक कोशिकाओं को तरोताजा रखने में सहायक तो होता ही है इसके अलावा रक्त संचार को सुचार रखने में बेहतर साबित होता है।

क्या आप जानते हैं दूध में गुड़ डालकर पीने के फायदे?,Benefits of Drinking Milk With Jaggery in Hindi

 

गर्म दूध के साथ गुड खाना सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होता है। आप यह जानकर हैरान हो जाएगे कि इन दोनो के मिलाकर पीने से सेहत के लिए किसी वरदान से कम नही है। यह गंभीर से गंभीर बीमारियों के सही कर देता है। अगर आप सर्दियों में नियमित रुप से गुड़ और दूध का सेवन करते हैं तो आप ना सिर्फ कई बीमारियों से दूर रह सकते हैं बल्कि कई और तरह से भी इसका लाभ उठा सकते हैं।
  • हम सभी जानते हैं कि दूध पीने से सेहत में कितना निखार आता है लेकिन गर्म दूध पीने से हमे क्‍या लाभ पहुंचता है, ये बहुत कम लोगों को पता है। और इस गर्म दूध के साथ अगर गुड खाया जाए तो इससे वजन कंट्रोल करने के साथ-साथ आपको त्वचा में निखार भी मिलता है। यह किसी औषधि से कम नही है। आज हम आपको बताएंगे कि गर्म-गर्म दूध के साथ गुड को अपने आहार में रोजाना शामिल करने से सेहत को कौन से फायदे मिलते हैं।
  • दूध में अधिक मात्रा में विटामिन ए, विटामिन बी और डी के अलावा कैल्शियम, प्रोटीन और लैक्ट‍िक एसिड पाया जाता है। वही दूसरी ओर गुड में अधिक मात्रा में सुक्रोज, ग्लूकोज, खनिज तरल और पानी कुछ मात्रा में पाई जाती है। इसके अलावा इसमें भरपूर मात्रा में कैल्शियम, फास्फोरस, लोहा और ताम्र तत्व भी अच्छी मात्रा में मिलते हैं। जानिए इन दोनों चीजों का सेवन करने से क्या फायदे है।
  • शरीर में अशुद्ध खून को करें साफ-गुड में ऐसे गुड पाए जाते है जो आपके शरीर में मौजूद अशुद्धियों को साफ कर देता है। इसलिए रोजाना गर्म दूध और गुड का सेवन करने से आपके शरीर से ऐसी अशुद्धियां निकल जाती है। जिससे आपको कोई बीमारी नहीं होगी
  • डॉक्टर हमेशा गर्भवती महिलाओं को थकावट और कमजोरी को दूर करने से लिए गुड़ का सेवन करने के सलाह देते हैं. अगर गर्भवती महिला हर रोज गुड़ खाती है तो उन्हें एनीमिया नहीं होता
  • मोटापा को करें कंट्रोल-माना जाता है कि अगर आप दूध के साथ चीनी का इस्तेमाल करते है तो इसकी जगह आप गुड का इस्तेमाल करें। ऐसा करने से आपका वजन कंट्रोल में रहेगा। जिससे आप मोटापा का शिकार नहीं होगे। 
  • पेट संबंधी समस्या हो रखें ठीक-अगर आपको पाचन संबधी कोई भी समस्या है तो गर्म-गर्म दूध और गुड का सेवन करने से आपको पेट संबंधी हर समस्या से निजात मिल जाता है। 
  • जोड़ो के दर्द को करें दूर-गुड़ खाने से जोड़ों के दर्द में आराम मिलता है। अगर रोजाना गुड़ का एक छोटा पीस अदरक के साथ मिला कर खाया जाए तो जोड़ों में मजबूती आएगी और दर्द दूर होगा।
  • आपकी खूबसूरती को बढाएं-गर्म दूध और गुड का सेवन करने से आपकी त्वचा मुलायम होने के साथ-साथ त्वचा संबंधी समस्या न होगी। साथ ही इसका सेवन करने से आपके बाल भी हेल्दी रहेगे।
  • पीरियड्स में दर्द को करें ठीक-कहा जाता है कि अगर आपको कही दर्द होतो गर्म दूध पीने से तुरंत आराम मिल जाता है और महिलाओं को पीरियड के समय का दर्द हो रहा हो तो गर्म दूध के साथ गुड का सेवन करने से आपको इससे निजात मिल सकता है। या फिर पीरियड शुरु होने के 1 हफ्ते पहले 1 चम्‍मच गुड़ का सेवन रोजाना करें। इससे आपको दर्द से निजात मिल जाएगा।
  • थकान को करें छूमंतर-अगर आप अधिक थक गए है तो थोड़ी देर में गर्म दूध और गुड का सेवन करें। इससे आपको तुंरत आराम मिलेगा। इसके अलावा रोजाना 3 चम्‍मच गुड़ लें। इससे आपको कभी थकान नहीं होगी। 

Wednesday, April 11, 2018

किडनी को कैसे रखें स्वस्थ,How to Keep your Kidneys Healthy in Hindi,किडनी साफ कैसे करे

 
किडनी को कैसे रखें स्वस्थ,How to Keep your Kidneys Healthy in Hindi,
हमारे शरीर के हानिकारक पदार्थो को शरीर से छानकर बाहर निकलने का काम किडनी का ही होता है! किडनी हमारे शरीर के लिए रक्त शोधक का काम करती है, हम जो कुछ भी खाते है उसमे से विषैले तत्वों और नुकसान पहुचने वाले पदार्थो को यूरिनरी सिस्टम (मूत्राशय) के जरिये बाहर निकाल देती है जिससे के शरीर ठीक तरीके से काम कर सके और जहरीले तत्व कोई हानि नहीं पंहुचा सके!

किडनी शरीर के महत्वपूर्ण अंगों में से एक है। किडनी रक्त में मौजूद पानी और व्यर्थ पदार्थो को अलग करने का काम करता है। इसके अलावा शरीर में रसायन पदार्थों का संतुलन, हॉर्मोन्स छोड़ना, रक्तचाप नियंत्रित करने में भी सहायता प्रदान करता है। यह लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण में भी सहायता करता है। इसका एक और कार्य है विटामिन-डी का निर्माण करना, जो शरीर की हड्डियों को स्वस्थ और मजबूत बनाता है।

लगातार दूषित पदार्थ खाने, दूषित जल पीने और नेफ्रॉन्स के टूटने से किडनी के रोग उत्पन्न होते हैं। इसके कारण किडनी शरीर से व्यर्थ पदार्थो को निकालने में असमर्थ हो जाते हैं। बदलती लाइफस्टाइल व काम के बढ़ते दबाव के कारण लोगों में जंकफूड व फास्ट फूड का सेवन ज्यादा करने लगे हैं।

इसी वजह से लोगों की खाने की प्लेट से स्वस्थ व पौष्टिक आहार गायब होते जा रहें हैं। किडनी के रोगों को दूर करने के लिए कुछ प्राकृतिक उपायों की मदद लेना बहुत फायदेमंद साबित हो सकता है।
ऐसे ही कुछ खास उपाय लेकर आए हैं हम आपके लिए।

एप्पल साइडर विनेगर

इसका प्रयोग कई शारीरिक जरूरतों के लिए किया जाता है। इसके अलावा किडनी संबंधी समस्याओं के बारे में भी काफी कारगर साबित होता है। इसमें मौजूद एंटी बैक्टीरियल तत्व शरीर को बैक्टीरियल इंफेक्शन से बचाते हैं जिसमें किडनी भी शामिल है। एप्पल साइडर विनेगर प्रयोग से किडनी में मौजूद स्टोन धीरे-धीरे अपनेआप खत्म हो जाता है। इसमें मूत्रवर्धक तत्व होते हैं जो किडनी से व्यर्थ पदार्थों को बाहर निकालते हैं और किडनी को स्वस्थ रखते हैं।

विटामिन

कुछ खास तरह के विटामिन के सेवन से किडनी को स्वस्थ व मजबूत बनाया जा सकता है। यूं तो विटामिन पूरे शरीर के लिए फायदेमंद होते हैं लेकिन कुछ खास तरह के विटामिन का सेवन किडनी को स्वस्थ रखने के लिए किया जाता है। विटामिन डी के सेवन से किडनी के रोगों के लक्षणों को कम किया जा सकता है। अगर आप हर रोज विटामिन बी6 का सेवन करें तो किडनी स्टोन की समस्या से बच सकते हैं या आप इस समस्या से ग्रस्त हैं तो बिना किसी डर इस विटामिन का सेवन कर सकते हैं। कुछ ही दिनों स्टोन की समस्या अपने आप खत्म हो जाएगी। इसके अलावा विटामिन सी के सेवन से किडनी को क्षतिग्रस्त होने से बचाया जा सकता है।

बेकिंग सोडा

ब्रिटिश शोधर्कर्ताओं के मुताबिक किडनी के रोगों से बचने के लिए सोडियम बाइकार्बोनेट का सेवन फायदेमंद होता है। इसके सेवन से किडनी के रोगों की गति को कम किया जा सकता है। बेकिंग सोडा की मदद से रक्त में होने वाली एसिडिटी की समस्या खत्म हो जाती है जो कि किडनी की समस्याओं के मुख्य कारणों में से एक है।

नमक की मात्रा कम लें

किडनी की समस्या से ग्रस्त लोगों को अपने आहार पर खास ध्यान देना चाहिए। खाने में नमक व प्रोटीन की मात्रा कम रखनी चाहिए जिससे किडनी पर कम दबाव पड़ता है। इसके अलावा फासफोरस और पौटेशियम युक्त आहार से भी दूर ही रहना चाहिए।

सब्जियों का रस

किडनी की समस्या होने पर गाजर, खीरा, पत्तागोभी तथा लौकी के रस पीना चाहिए। इससे किडनी के रोगों से उबरने में मदद मिलती है और किडनी स्वस्थ रहती है। इसके अलावा तरबूज तथा आलू का रस भी गुर्दे के रोग को ठीक करने के लिए सही होता है इसलिए पीड़ित रोगी को इसके रस का सेवन सुबह शाम करना चाहिए।

मुनक्का का पानी

व्यक्ति को रात के समय में सोते वक्त कुछ मुनक्का को पानी में भिगोने के लिए रखना चाहिए तथा सुबह के समय में मुनक्का पानी से निकाल कर, इस पानी को पीना चाहिए। ऐसा कुछ दिनों तक लगातार करने से गुर्दे का रोग जल्दी ही ठीक हो जाता है।

पानी ज्यादा पीएं

गुर्दे के रोगों से बचने के लिए थोड़ी-थोड़ी देर में पानी पीते रहें। इससे किडनी में मौजूद व्यर्थ पदार्थ यूरीन के जरिए बाहर निकल जाएगें और आप किडनी के रोगों से बचे रहेंगे। चाहें तों पानी में नींबू के रस को निचोड़ कर भी पी सकते हैं इससे शरीर को विटामिन सी व पानी दोनों साथ मिलेगा। किडनी की समस्याओं से बचने के लिए किडनी को स्वस्थ रखना जरूरी है। इन खास प्राकृतिक उपायों को अपनाएं और किडनी रोगों से रहें कोसों दूर।

धूम्रपान एवं तम्बाकू का सेवन न करें

धूम्रपान एवं तम्बाकू के सेवन से कई गंभीर समस्याएं तो होती ही हैं, लेकिन इसके कराण ऐथेरोस्कलेरोसिस रोग भी होता है। जिससे रक्त नलिकाओं में खून का बहाव धीमा पड़ जाता है और किडनी में रक्त कम जाने से उसकी कार्यक्षमता घट जाती है। इसलिए धूम्रपान और तंबाकू का सेवन करने से बचें।

किडनी को मजबूत बनाने वाले योग

किडनी रोग का बहुत समय तक पता नहीं चलता, लेकिन जब भी कमर के पीछे दर्द उत्पन्न हो तो इसकी जांच करा लेनी चाहिए। आइए जानें योग के जरिए किडनी को कैसे मजबूत बनाया जा सकता है।

अंर्धचंद्रासन

इस आसन को करते वक्त शरीर की स्थिति अर्ध चंद्र के समान हो जाती है, इसीलिए इसे अर्ध चंद्रासन कहते है। इस आसन की स्थि‍ति त्रिकोण समान भी बनती है इससे इसे त्रिकोणासन भी कह सकते है, क्योंकि दोनों के करने में कोई खास अंतर नहीं होता। यह आसन खड़े होकर किया जाता है। इससे किडनी से जुड़ी सभी समस्याएं दूर हो जाती हैं।

पश्चिमोत्तनासन

अपने पैर को सामने की ओर सीधी स्ट्रेच करके बैठ जाएं। दोनों पैर आपस में सटे होने चाहिए। पीठ को इस दौरान बिल्कुल सीधी रखें और फिर अपने हाथों से दोनों पैरों के अंगूठे को छूएं। ध्यान रखें कि आपका घुटना न मुड़े और अपने ललाट को नीचे घुटने की ओर झुकाएं। 5 सेकंड तक रुकें और फिर वापस अपनी पोजीशन में लौट आएं। यह पोजीशन किडनी की समस्या के साथ क्रैम्स आदि जैसी समस्याओं से निजात दिलाता है।

उष्ट्रासन

उष्ट्रासन करते समय हमारे शरीर की आकृति कुछ-कुछ ऊँट के समान प्रतीत होती है, इसी कारण इसे उष्ट्रासन कहते हैं। यह आसन वज्रासन में बैठकर किया जाता है। इस आसन से घुटने, ब्लैडर, किडनी, छोटी आँत, लीवर, छाती, लंग्स एवं गर्दन तक का भाग एक साथ प्रभावित होता है, जिससे क‍ि यह अंग निरोगी बने रहते हैं।

सर्पासन

पेट के बल लेट जाएं और दोनों पैरों को मिलाकर रखें। ठुड्डी को जमीन पर रखें। दोनों हाथों को कोहनी से मोड़ें और हथेलियों को सिर के दाएं-बाएं रखें और हाथों को शरीर से सटाकर रखें। आपकी कोहनी जमीन को छूती हुई रहेगी। धीरे-धीरे सांस भरे और कंधे को ऊपर की ओर उठाएं शरीर का भार कोहनी और हाथों पर रहेगा। कोशिश करें कि छाती भी ऊपर की ओर रहे। इस स्थिति में कुछ पल रुकें और सांस को सामान्य कर लें। इस स्थिति में आप दो मिनट तक रुकें। अगर रोक पाना संभव न हो तो पाँच बार इस क्रिया को दोहराएं।
किडनी को स्वस्थ रखने और इसकी समस्याओं को दूर करने के लिए नियमित योगा करना आपके लिए बहुत फायदेमंद हो सकता है।

पपीते के पत्ते का रस,Health Benefits of Papaya Leaf Juice in Hindi,

 

वरदान है पपीते के पत्ते का रस क्योंकि इसमे है 5 विटामिन का भरपूर मिश्रण | पपीते के पत्ते खाने में कड़वे लगते हैं लेकिन उनमें कमाल के गुण छुपे हुए होते हैं. पपीते के पत्तों में विटामिन ''ए',''बी',''सी',''डी' और ''ई' पाया जाता है साथ ही इसमें कैल्शियम भी पाया जाता है.

पपीता एक ऐसा फल है जिसको बहुत से लोग पसंद करते हैं और स्वास्थ्य में भी यह फल बहुत ज्यादा योगदान देता है पर क्या आप जानते हैं कि पपीते के पत्ते में भी बहुत से रोगों का निदान छुपा हुआ हैं, पपीते के पत्तों से कई प्रकार के रोगों का निदान संभव है जो की अपने में काफी घटक होते हैं। जानकारी के लिए आपको बता दें की डेंगू के इलाज के लिए भी पपीते के पत्तों का उपयोग बहुत ज्यादा लाभकारी रहता हैं यही कारण है की डेंगू के दौरान पपीते के पत्तो की मांग काफी बढ़ जाती है। साथ ही इसके पत्तों का रस पेट के कब्ज में भी बहुत ज्यादा लाभकारी होता है। ऐसे भी बहुत से फायदे पपीते के पत्तों के होते हैं जिनके बारे में आज हम आपको बता रहें हैं।

पपीते के पत्ते के रस के फायदे,Health-Benefits-of-Papaya-Leaf-Juice-in-Hindi

  • मुंहासे दूर करे : अगर चेहरे पर मुंहासे हैं तो सूखी पपीते की पत्ती लेकर उसे थोड़े से पानी के साथ मिक्स कर के पेस्ट बना लें. फिर इस पेस्ट को चेहरे पर लगा कर सुखा लें और फिर पानी से धो लें।
  • कैंसर होने से रोके : इसमें कैंसर विरोधी गुण होते हैं जो कि इम्यूनिटी को बढ़ाने में मदद करते हैं और सवाईकल कैंसर, ब्रेस्ट कैंसर, अग्नाशय, जिगर और फेफड़ों के कैंसर को होने से रोकते हैं।
  • बैक्टीरिया की ग्रोथ रोके : पपीते की पत्तियों में 50 एक्टिव सामग्रियां होती हैं जो कि सूक्ष्मजीवों जैसे फंगस, कीड़े, परजीवी और कैंसर कोशिकाओं के विभिन्न अन्य रूपों को बढ़ने से रोकती हैं।
  • इम्यूनिटी बढ़ाए : इन पत्तियों में सर्दी और जुखाम जैसे रोगों से लड़ने की शक्ति होती है. यह खून में व्हाइट ब्लड सेल्स और प्लेटलेट्स को विकास बढ़ा देती है।
  • एंटी मलेरिया गुण : यह मलेरिया से लड़ने में प्रभावकारी है. पपीते की पत्तियों का रस मलेरिया के लक्षणों को बढ़ने से रोकता है।
  • डेंगू में रामबाण : डेंगू से लड़ने के लिए पपीते की पत्तियां काफी लाभकारी है. यह गिरते हुए प्लेटलेट को बढ़ाने, खून के थक्के जमने तथा जिगर की क्षति को रोकती है, जो कि डेंगू वायरस के कारण हो जाता है।
  • माहवारी के दर्द से छुटकारा : दर्द को दूर करने के लिए एक काढ़ा बनाइए जिसमें एक पपीते की पत्ती को इमली, नमक और एक गिलास पानी के साथ मिक्स कीजिए. फिर इसे उबालिए और जब काढ़ा बन कर ठंडा हो जाए तब इसे पी लीजिए, इससे आपको आराम मिलेगा।
  • पपीते की पत्तियों का जूस अन्य फलों के जूस के साथ मिला कर भी रोगी को दे सकते हैं
  • पपीता का सेवन रोज करने से पाचन शक्ति में वृद्धि होती है। पका पपीता पाचन शक्ति को बढ़ाता है, भूख को बढ़ाता है, मोटापे को नियंत्रित करता है और अगर आपको खट्टी डकारें आती हैं तो पपीते का रस उसे भी बंद कर देगा। पके या कच्चे पपीते की सब्जी बना कर खाना पेट के लिए लाभकारी होता है।
  • पपीते के पत्तों के उपयोग से उच्च रक्तचाप में लाभ होता है और हृदय की धड़कन ठीक रहती है। यह पौरुष को बढ़ाता है, पागलपन को दूर करता है एवं वात दोषों को नष्ट करता है।
  • अगर आप पपीता खाते रहते हैं तो आपको किसी कारण से होने वाला जख्म भी जल्द भरता है।
  • लगभग हर मौसम में सस्ते में ही मिल जाने वाला पपीता आपकी खूबसूरती में चार चांद लगाता है। कच्चे पपीते का दूध त्वचा रोग के लिए काफी फायदेमंद साबित होता है।
  • पपीते का प्रयोग लोग फेस पैक में भी करते हैं। त्वचा को ठंडक पहुंचाने वाला पपीता आंखों के नीचे के काले घेरे को दूर करता है। अगर आप कील-मुंहासों से परेशान हैं तो कच्चे पपीते के गूदे को शहद में मिलाकर चेहरे पर लगाएं और जब वह सूख जाए तो गुनगुने पानी से चेहरा धो लें। उसके बाद मूंगफली के तेल से हल्के हाथ से चेहरे पर मालिश करें।
  • एक महीने तक नियमित रूप से ऐसा करने से आपको काफी लाभ होगा।पपीता कफ के साथ आने वाले खून को रोकता है और खूनी बवासीर को भी ठीक करता है। हृदय रोगियों के लिए भी पपीता काफी लाभदाक होता है। पपीते के दस बीज पानी में पीस कर चौथाई कप पानी में मिला कर पीने से पेट के कीड़े मर जाते हैं। इसका एक हफ्ते तक नियमित रूप से प्रयोग करना चाहिए।
  • बच्चा मां के दूध पर निर्भर रहता है, लेकिन कई बार ऐसा देखने में आता है कि मां को पर्याप्त दूध नहीं होता, जिससे बच्चा भूखा रह जाता है। कच्चे पपीते की सब्जी खाने से मां के दूध में वृद्धि होती है।
  • पीले रंग का फल पपीते का गुदा पेट की परेशानी जैसे कब्ज , अपच को दूर करता है । अगर किसी व्यक्ति को पीलिया होता है तो पपीता बहुत ही फायदेमंद होता है ।
  • पपीते मे पपेन नमक पदार्थ होता है जो भोजन को पचाने मे सहायक होता है ।चेहरे को सुंदर बनाने के लिए भी इसका उपयोग किया जाता है । पपीते को चेहरे पर लगाने से चेहरे पर मुहासे नही होते तथा यह चेहरे की झाइयो को भी कम करता है ।
  • पपीते का उपयोग कई लोग प्रकृतिक ब्लीच के रूप मे भी करते है । पपीता आख के लिए भी हितकारी होता है इसमे विटामिन A प्रचुर मात्रा मे होता है जिससे रातोंधी नमक रोग नही होता साथ ही साथ आखो की रोशनी भी बढती है ।
  • पपीता दातों के लिए भी फायदेमंद होता है अगर दातों मे से खून आता है तो पपीता उसमे भी लाभकारी है
  • आज के दौर में ऐसे खाने से मुंह मोड़ना जो आपके पाचन तंत्र के लिए बुरा हो, लगभग असंभव है। कई बार हम ऐसा भोजन करने को मजबूर होते हैं जो या तो जंक फ़ूड की श्रेणी में आता है या अधिक तेल में पका होता है। रोज़ एक पपीते का सेवन कभी-कभार खाए ऐसे भोजन के साइड-इफेक्ट को दूर रखता है क्योंकि इसमें फाइबर के साथ-साथ पपैन नामक एक एंजाइम होता है जो आपकी पाचन शक्ति को दुरुस्त रखता है।
  • पपीता बवासीर रोग मे भी फायदेमंद है पपीता खाने से कब्ज नही होती तो बवासीर रोग मे भी लाभ होता है ।
  • पपीता मधुमेह रोगियों के लिए आहार के रूप में एक बेहतरीन विकल्प है क्योंकि स्वाद में मीठा होने के बावजूद इसमें शुगर नाम मात्र का होता है। साथ ही, वे लोग जो मधुमेह के मरीज़ नहीं हैं, इसे खाकर मधुमेह होने के खतरों को दूर कर सकते हैं।
  • डाइटिंग कर रहे व्यक्तियों के लिए तो पपीता राम बाण है । कई लोग जो डाइटिंग कर रहे है वह पपीते को अपने खाने मे शामिल करते है ।
  • पपीता साल मे 12 महीने मिलता है यह फल तथा सब्जी दोनों के रूप मे उपयोगी है । पपीते का उपयोग जेम तथा जेली बनाने मे भी किया जाता है ।
  • पपीते में फाइबर, विटामिन सी और एंटी-ऑक्सीडेंट प्रचुर मात्रा में होता है जो आपकी रक्त-शिराओं में कोलेस्ट्रोल के थक्के नहीं बनने देता। कोलेस्ट्रोल के थक्के दिल का दौरा पड़ने और उच्च रक्तचाप समेत कई अन्य ह्रदय रोगों का कारण बन सकते हैं।
  • आपका प्रतिरोधक तंत्र आपको बीमार कर देने वाले कई संक्रमणों के विरुद्ध ढाल का काम करता है। केवल एक पपीते में इतना विटामिन सी होता है जो आपके प्रतिदिन की विटामिन सी की आवश्यकता का 200 प्रतिशत होता है। ज़ाहिर तौर पर ये आपके प्रतिरोधक तंत्र को मज़बूत करता है।
  • जिन लोगों का लक्ष्य अपना वज़न कम करना है उन्हें अपने आहार में पपीते को ज़रूर शामिल करना चाहिए क्योंकि इसमें कैलोरी बहुत कम होती है। पपीते में मौजूद फायबर एक और जहां आपको तारो-ताज़ा महसूस करवाता है वहीं आपकी आँत की मूवमेंट को ठीक रखता है जिसके फलस्वरूप वज़न घटाना आसान हो जाता है।
  • पपीते में विटामिन ए भी प्रचुर मात्रा में होता है जो आपके आँखों की रोशनी को कम होने से बचाता है। कोई भी व्यक्ति उम्र बढ़ने की वजह से आँखों की रोशनी से मरहूम नहीं होना चाहता, और पपीते को अपने आहार में शामिल करके आप ऐसी मुसीबत से बाख सकते हैं।
  • गठिया वास्तव में एक ऐसी बीमारी है जो शरीर को बेहद दुर्बल तो करती ही है जीवनशैली को बुरी तरह प्रभावित भी करती है। पपीते खाना आपकी हड्डियों के लिए बेहद लाभकारी हो सकता है, इनमें विटामिन-सी के साथ-साथ सूजन-रोधी गुण होते हैं जो गठिया के कई रूपों से शरीर को दूर रखता है। एक अध्ययन के अनुसार विटामिन-सी युक्त भोजन न लेने वाले लोगों में गठिया का खतरा विटामिन-सी का सेवन करने वालों के मुकाबले तीन गुना होता है।

Tuesday, April 10, 2018

दमा के घरेलु उपचार,Asthma Treatment In Hindi,

 
दमा के घरेलु उपचार,Asthma Treatment In Hindi,


यह रोग किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकता है।श्वास पथ की मांसपेशियों में आक्छेप होने से सांस लेने निकालने में कठिनाई होती है।खांसी का वेग होने और श्वासनली में कफ़ जमा हो जाने पर तकलीफ़ ज्यादा बढ जाती है।रोगी बुरी तरह हांफ़ने लगता है।दमा बहुत कष्ट देने वाली बीमारी है। यह बीमारी किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकती है।

लक्षण,Asthma Symptoms,

  • दमा में सांस लेने वा निकालने में परेशानी होती है। 
  • खांसी की त्रीवता और साँस की नली में कफ़ जमा हो जाने से तकलीफ़ और भी ज्यादा बढ जाती है 
  • दमा का अटैक पड़ने पर रोगी बुरी तरह हांफ़ने लगता है। 
  • दमा होने पर खांसी, नाक का बजना, छाती का कड़ा हो जाना, सुबह और रात में सांस लेने में तकलीफ होने जैसे लक्षण होते हैं। 
  • समान्यता दमा, एलर्जी पैदा करने वाले पदार्थों ,धूम्रपान करने से, ज्यादा सर्द गर्म मौसम, सुगन्धित पदार्थों, ज्यादा कसरत करने और मानसिक तनाव की वजह से काफी तकलीफ देता है 
  • दमा को पूरी तरह से ठीक करना मुश्किल है, लेकिन इस पर नियंत्रण हो सकता है, ताकि व्यक्ति सामान्य जीवन जी सके।

घरेलु उपचार,Asthma Treatment In Hindi,Home remedies for asthma,

  • 100 ग्राम दूध में लहसुन की पांच कलियां धीमी आँच पर उबाकर इस का हर रोज दिन में दो बार सेवन करने से दमे में काफी फायदा मिलता है। 
  • तुलसी के 10-15 पत्ते पानी से साफ़ कर लें फ़िर उन पर काली मिर्च का पावडर बुरककर खाने से दमा मे आराम मिलता है। 
  • एक पके केले में चाकू से लम्बाई में चीरा लगाकर उसमें एक चौथाई छोटा चम्मच महीन पीसी काली मिर्च भर दें। फिर उसे 2-3 घंटे बाद हल्की आँच में छिलके सहित भून लें। ठंडा होने पर केले का छिलका निकालकर केला खा लें। एक माह में ही दमें में खूब लाभ होगा। 
  • लहसुन की दो पिसी कलियां और अदरक की गरम चाय पीने से भी अस्थमा नियंत्रित रहता है। इस चाय का सेवन सबेरे और शाम करना चाहिए। 
  • 4-5 लौंग को 150 पानी में 5 मिनट तक उबालें। इस मिश्रण को छानकर इसमें एक चम्मच शुद्ध शहद मिलाकर गरम-गरम पी लें। रोज दो से तीन बार यह काढ़ा पीने से निश्चित रूप से लाभ मिलता है। 
  • 250 ग्राम पानी में मुट्ठीभर सहजन की पत्तियां मिलाकर उसे 5 मिनट तक उबालें। फिर ठंडा होने पर उसमें चुटकी भर नमक, कालीमिर्च और नीबू रस मिलाएं, इस सूप का रोज़ सेवन करें लाभ मिलेगा। 
  • एक चम्मच मैथीदाना को एक कप पानी में उबालें। ठंडा होने पर उसमें अदरक का एक चम्मच ताजा रस और स्वादानुसार शहद मिलाएं। सबेरे-शाम नियमित रूप से इसका सेवन करने से निश्चित ही बहुत लाभ मिलता है। 
  • एक चम्मच हल्दी को दो चम्मच शहद में मिलाकर चाट लें दमा का दौरा तुरंत काबू में आ जायेगा। 
  • तुलसी के पत्तों को पानी में पीसकर इसमें दो चम्मच शहद मिलाकर सेवन करने से दमा रोग में शीघ्र ही लाभ मिलता है। 
  • दमें में खाँसी होने पर पहाडी नमक सरसों के तेल मे मिलाकर छाती पर मालिश करने से तुरंत आराम मिलता है। 
  • एक चम्मच हल्दी एक गिलास गर्म दूध में मिलाकर पीने से दमा काबू मे रहता है। हल्दी के एन्टीऑक्सीडेंट गुण के कारण एलर्जी भी नियंत्रण में रहती है। 
  • सूखे अंजीर 4 - 5 पीस रात भर पानी मे भिगोकर सुबह खाली पेट खाएं। इससे श्वास नली में जमा बलगम ढीला होकर बाहर निकलता है, स्थाई रूप से आराम प्राप्त होता है । 
  • आंवला दमा रोग में बहुत लाभदायक है। एक चम्मच आंवला रस मे दो चम्मच शहद मिलाकर पीने से फ़ेफ़डे ताकतवर बनते हैं
  • लहसुन की ५ कली चाकू से बारीक काटकर ५० मिलि दूध में उबालें।यह मिक्श्चर सुबह-शाम लेना बेहद लाभकारी है।
  • अनुसंधान में यह देखने में आया है कि आंवला दमा रोग में अमृत समान गुणकारी है।एक चम्मच आंवला रस मे दो चम्मच शहद मिलाकर लेने से फ़ेफ़डे ताकतवर बनते हैं। 
  • दमे का मरीज उबलते हुए पानी मे अजवाईन डालकर उठती हुई भाप सांस में खींचे ,इससे श्वास-कष्ट में तुरंत राहत मिलती है।
  • चाय बनाते वक्त २ कली लहसुन की पीसकर डाल दें। यह दमे में राहत पहुंचाता है। सुबह-शाम पीयें।

तेजपात के फायदे-Health Benefits of bay leaf in Hindi,

 
तेजपात को प्राचीन आयुर्वेद में एक औषधी के रूप में इस्तेमाल किया जाता रहा है। तेजपात खाने का स्वाद और महक दोनों को बढ़ाता है। क्या आप जानते हैं तेजपात के सेवन से कई तरह की बीमारियां ठीक हो सकती हैं। आयुर्वेद में तेजपात के उन रहस्यों को आपको बताया जाएगा जिससे आप आरोग्य और लंबी उम्र बनायेगा

तेजपात के फायदे Health Benefits of bay leaf in Hindi,

  • तेजपात के 4-5 पत्तों को एक गिलास पानी में इतने उबालें की पानी आधा रह जाए . इस पानी से प्रतिदिन सिर की मालिश करने के बाद नहाएं . इससे सिर में जुएं नहीं होती हैं महिलाओं के लिए एक उत्तम जूं नाशक है . 
  • चाय-पत्ती की जगह तेजपात के चूर्ण की चाय पीने से सर्दी-जुकाम,छींकें आना ,नाक बहना,जलन सिरदर्द आदि में शीघ्र लाभ मिलता है 
  • तेजपात के पत्तों का बारीक चूर्ण सुबह-शाम दांतों पर मलने से दांतों पर चमक आ जाती है . 
  • तेजपात के पत्रों को नियमित रूप से चूंसते रहने से हकलाहट में लाभ होता है 
  • जिन लोगों को हकलाने की आदत हो वे तेजपात के पत्तों को रोज चूसें। इससे हकलाने की समस्या ठीक होती है। 
  • खांसी की समस्या से निजात पाने के लिए शहद के साथ 1 चम्मच तेजपात के चूर्ण को मिलाकर पीने से खांसी से राहत मिलती है। 
  • सिर दर्द, छीकों का अधिक आना, सर्दी जुकाम और पेट में जलन होने पर तेजपात के चूर्ण की चाय पीने से ठीक हो जाते हैं। चाय की पत्ती की जगह तेजपात का चूर्ण डालें। 
  • दमा के रोगीयों के लिए तेजपात एक बेहतर दवाई है। मिश्री, अदरक, पीपल और तेजपात को बराबर की मात्रा में मिलाकर चटनी बना लें फिर डेली 1 चम्मच चटनी का सेवन करें। 
  • कमजोर आखों की कमजोरी को दूर करने के लिए और आंखों की सफाई के लिए तेजपात के चूर्ण का सुरमा लगा सकते हो। यह आंखों की दृष्टि को तेज भी बनाता है। 
  • पेट सबंधी बीमारियों को दूर करने के लिए आप तेजपात का काढ़ा बनाकर पीएं। इससे आंत और दस्त की परेशानी ठीक होती है 
  • उनी, रेशमी और सूती कपड़ों को कीड़ों से बचाने के लिए तेजपातों को कपड़ों के बीच में रख दें। 
  • जिन लोगों के पैर में बदबू की समस्या होती है वे तेजपात के चूर्ण को पैर के तलुवों पर मलें और फिर जुराबें पहनें 
  • तेजपात सेहत के लिए एक बेहतर औषधी है। तेजपात बीमारियों को दूर करने के साथ साथ खाने का स्वाद और महक को भी बढ़ाता 
  • दांतों की मजबूती और दांतो में कीड़े की समस्या से बचने के लिए सप्ताह में 3 से 4 दिन तेजपात के चूर्ण से दांतों का मंजन करें। 
  • यदि पेट में गैस की समस्या है तो 3 चुटकी तेजपात का चूर्ण को पानी के साथ सेवन करें। आपको राहत मिलेगी। साथ ही साथ यह पेट में जलन यानि एसीडिटी की दिक्कत को भी दूर करता है। 
  • मुंह की दुर्गन्ध को दूर करने के लिए तेजपात का टुकड़ा खाना खाने के बाद खाएं। यदि आपको हाथों के बगल में पसीना अधिक आता हो तो तेजपात के चूर्ण को पाउडर की तरह हाथों के बगलों में लगायें। 
  • नियमित अपने खाने में तेजपात का इस्तेमाल करने से आप कभी भी दिल की परेशानी से परेशान नहीं होगे। 
  • एक चम्मच तेजपात चूर्ण को शहद के साथ मिलाकर सेवन करने से खांसी में आराम मिलता है . 
  • तेजपात के पत्तों का क्वाथ (काढ़ा) बनाकर पीने से पेट का फूलना व अतिसार आदि में लाभ होता है 
  • इसके २-४ ग्राम चूर्ण का सेवन करने से उबकाई मिटती है . 
  • दमा में ....तेजपात ,पीपल,अदरक, मिश्री सभी को बराबर मात्र में लेकर चटनी पीस लीजिए।१-१ चम्मच चटनी रोज खाएं ४० दिनों तक। फायदा सुनिश्चित है। 
  • दांतों के लिए ...सप्ताह में तीन दिन तेजपात के बारीक चूर्ण से मंजन कीजिए। दांत मजबूत होंगे, दांतों में कीड़ा नहीं लगेगा ,ठंडा गरम पानी नहीं लगेगा , दांत मोतियों की तरह चमकेंगे। 
  • दांतों की प्राकृतिक चमक पाने के लिए तेजपात का चूर्ण दांतों पर सुबह शाम मलना चाहिए। 
  • कपड़ों के बीच में तेजपात के पत्ते रख दीजिए ,ऊनी,सूती,रेशमी कपडे कीड़ों से बचे रहेंगे। अनाजों के बीच में 4-5 पत्ते डाल दीजिए तो अनाज में भी कीड़े नहीं लगेंगे। उनमें एक दिव्य सुगंध जरूर बस जायेगी। 
  • अनेक लोगों के मोजों से दुर्गन्ध आती है ,वे लोग तेजपात का चूर्ण पैर के तलुवों में मल कर मोज़े पहना करें। पर इसका मतलब ये नहीं कि आप महीनों तक मोज़े धुलें ही न। वैसे भी अंदरूनी कपडे और मोज़े तो रोज धुलने चाहिए। मुंह से दुर्गन्ध आती है तो तेजपात का टुकड़ा चबाया करें। बगल के पसीने से दुर्गन्ध आती है तो तेजपात का चूर्ण पावडर की तरह बगलों में लगाया करें। 
  • अगर अचानक आँखों कि रोशनी कुछ कम होने लगी है तो तेजपात के बारीक चूर्ण को सुरमे की तरह आँखों में लगाएं। इससे आँखों की सफाई हो जायेगी और नसों में ताजगी आ जायेगी जिससे आपकी दृष्टि तेज हो जायेगी। इस प्रयोग को लगातार करने से चश्मा भी उतर सकता है। 
  • पेट में गैस की वजह से तकलीफ महसूस हो रही हो तो ३-४ चुटकी या ४ मिली ग्राम तेजपात का चूर्ण पानी से निगल लीजिए। एसीडिटी की तकलीफ में इसका लगातार सेवन बहुत फायदा करता है और पेट को आराम मिलता है। 
  • तेजपात का अपने भोजन में लगातार प्रयोग कीजिए ,आपका ह्रदय मजबूत बना रहेगा ,कभी हृदय रोग नहीं होंगे। 
  • पागलपन के लिए ...एक एक ग्राम तेजपात का चूर्ण सुबह शाम रोगी को पानी या शहद से खिलाएं।या तेजपात के चूर्ण का हलुआ बनाकर खिलाएं। सूजी के हलवे में एक चम्मच तेजपात का चूर्ण डाल दीजिए। बन गया हलवा। 
  • तेजपात के टुकड़ों को जीभ के नीचे रखा रहने दें ,चूसते रहे। एक माह में हकलाना खत्म हो जाएगा। 
  • दिन में चार बार चाय में तेजपत्ता उबाल कर पीजिए ,जुकाम-जनित सभी कष्टों में आराम मिलेगा। या चाय में चायपत्ती की जगह तेजपत्ता डालिए। खूब उबालिए ,फिर दूध और चीनी डालिए। 
  • पेट की किसी भी बीमारी में तेजपत्ते का काढा बनाकर पीजिए। दस्त, आँतों के घाव, भूख न लगना सभी में आराम मिलेगा। 
  • . तेजपात के 5 पत्तों को पानी में उबालें और उस पानी से सिर की मालिश और बादमे नहा लें एैसा करने से बाल मजबूत तो बनते हैं साथ ही सिर में जुएं भी नहीं होते

लीवर की परेशानी का आयुर्वेदिक इलाज Liver Problems In Hindi,

 


आज कल चारो और लीवर के मरीज हैं, किसी को पीलिया हैं, किसी का लीवर सूजा हुआ हैं, किसी का फैटी हैं, और डॉक्टर बस नियमित दवाओ पर चला देते हैं मरीज को, मगर आराम किसी को मुश्किल से ही आते देखा हैं लीवर हमारे शरीर का सबसे मुख्‍य अंग है, यदि आपका लीवर ठीक प्रकार से कार्य नहीं कर पा रहा है तो समझिये कि खतरे की घंटी बज चुकी है। लीवर की खराबी के लक्षणों को अनदेखा करना बड़ा ही मुश्‍किल है और फिर भी हम उसे जाने अंजाने अनदेखा कर ही देते हैं।

लीवर खराब होने के मुख्य कारण,The main reason for liver failure

लीवर की खराबी होने का कारण ज्‍यादा तेल खाना, ज्‍यादा शराब पीना और कई अन्‍य कारणों के बारे में तो हम जानते ही हैं। हालाकि लीवर की खराबी का कारण कई लोग जानते हैं पर लीवर जब खराब होना शुरु होता है

तब हमारे शरीर में क्‍या क्‍या बदलाव पैदा होते हैं यानी की लक्षण क्‍या हैं, इसके बारे में कोई नहीं जानता। वे लोग जो सोचते हैं कि वे शराब नहीं पीते तो उनका लीवर कभी खराब नहीं हो सकता तो वे बिल्‍कुल गलत हैं।

आप जानते हैं कि मुंह से गंदी बदबू आना भी लीवर की खराबी हो सकती है। हम आपको कुछ परीक्षण बताएंगे जिससे आप पता लगा सकते हैं कि क्‍या आपका लीवर वाकई में खराब है। कोई भी बीमारी कभी भी चेतावनी का संकेत दिये बगैर नहीं आती, इसलिये आप सावधान रहें।

मुंह से बदबू यदि लीवर सही से कार्य नही कर रहा है तो आपके मुंह से गंदी बदबू आएगी। ऐसा इसलिये होता है क्‍योकि मुंह में अमोनिया ज्‍याद रिसता है। लीवर खराब होने का एक और संकेत है कि स्‍किन क्षतिग्रस्‍त होने लगेगी और उस पर थकान दिखाई पडने लगेगी। आंखों के नीचे की स्‍किन बहुत ही नाजुक होती है जिस पर आपकी हेल्‍थ का असर साफ दिखाई पड़ता है।

पाचन तंत्र में खराबी यदि आपके लीवर पर वसा जमा हुआ है और या फिर वह बड़ा हो गया है, तो फिर आपको पानी भी नहीं हजम होगा। त्‍वचा पर सफेद धब्‍बे यदि आपकी त्‍वचा का रंग उड गया है और उस पर सफेद रंग के धब्‍बे पड़ने लगे हैं तो इसे हम लीवर स्‍पॉट के नाम से बुलाएंगे।

यदि आपकी पेशाब या मल हर रोज़ गहरे रंग का आने लगे तो लीवर गड़बड़ है। यदि ऐसा केवल एक बार होता है तो यह केवल पानी की कमी की वजह से हो सकता है। यदि आपके आंखों का सफेद भाग पीला नजर आने लगे और नाखून पीले दिखने लगे तो आपको जौन्‍डिस हो सकता है। इसका यह मतलब होता है कि आपका लीवर संक्रमित है।

लीवर एक एंजाइम पैदा करता है जिसका नाम होता है बाइल जो कि स्‍वाद में बहुत खराब लगता है। यदि आपके मुंह में कडुआहर लगे तो इसका मतलब है कि आपके मुंह तब बाइल पहुंच रहा है। जब लीवर बड़ा हो जाता है तो पेट में सूजन आ जाती है, जिसको हम अक्‍सर मोटापा समझने की भूल कर बैठते हैं।

मानव पाचन तंत्र में लीवर एक म‍हत्‍वपूर्ण हिस्‍सा है। विभिन्‍न अंगों के कार्यों जिसमें भोजन चयापचय, ऊर्जा भंडारण, विषाक्त पदार्थों को बाहर निकलना, डिटॉक्सीफिकेशन, प्रतिरक्षा प्रणाली का समर्थन और रसायनों का उत्‍पादन शामिल हैं। लेकिन कई चीजें जैसे वायरस, दवाएं, आनुवांशिक रोग और शराब लिवर को नुकसान पहुंचाने लगती है। लेकिन यहां दिये उपायों को अपनाकर आप अपने लीवर को मजबूत और बीमारियों से दूर रख सकते हैं।

लीवर की परेशानी ये घरेलू कुछ उपाय ,Home Remedies for liver problems

► हल्‍दी लीवर के स्‍वास्‍थ्‍य में सुधार करने के लिए अत्‍यंत उपयोगी होती है। इसमें एंटीसेप्टिक गुण मौजूद होते है और एंटीऑक्सीडेंट के रूप में कार्य करती है। हल्दी की रोगनिरोधन क्षमता हैपेटाइटिस बी व सी का कारण बनने वाले वायरस को बढ़ने से रोकती है। इसलिए हल्‍दी को अपने खाने में शामिल करें या रात को सोने से पहले एक गिलास दूध में थोड़ी सी हल्दी मिलाकर पिएं► सेब का सिरका लीवर में मौजूद विषैले पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है। भोजन से पहले सेब के सिरके को पीने से शरीर की चर्बी घटती है। सेब के सिरके को आप कई तरीके से इस्‍तेमाल कर सकते हैं- एक गिलास पानी में एक चम्मच सेब का सिरका मिलाएं, या इस मिश्रण में एक चम्मच शहद मिलाएं। इस म‍िश्रण को दिन में दो से तीन बार लें।

►आंवला विटामिन सी के सबसे संपन्न स्रोतों में से एक है और इसका सेवन लीवर की कार्यशीलता को बनाये रखने में मदद करता है। अध्ययनों ने साबित किया है कि आंवला में लीवर को सुरक्षित रखने वाले सभी तत्व मौजूद हैं। लीवर के स्‍वास्‍थ्‍य के लिए आपको दिन में 4-5 कच्चे आंवले खाने चाहिए.

► पपीता लीवर की बीमारियों के लिए सबसे सुरक्षित प्राकृतिक उपचार में से एक है, विशेष रूप से लीवर सिरोसिस के लिए। हर रोज दो चम्मच पपीता के रस में आधा चम्मच नींबू का रस मिलाकर पिएं। इस बीमारी से पूरी तरह निजात पाने के लिए इस मिश्रण का सेवन तीन से चार सप्ताहों के लिए करें.


►सिंहपर्णी जड़ की चाय लीवर
Choudhary: सिंहपर्णी जड़ की चाय लीवर के स्‍वास्‍थ्‍य को बढ़ावा देने वाले उपचारों में से एक है। अधिक लाभ पाने के लिए इस चाय को दिन में दो बार पिएं। आप चाहें तो जड़ को पानी में उबाल कर, पानी को छान कर पी सकते हैं। सिंहपर्णी की जड़ का पाउडर बड़ी आसानी से मिल जाएगा।


►लीवर की बीमारियों के इलाज के लिए मुलेठी का इस्‍तेमाल कई आयुर्वेदिक औषधियों में किया जाता है। इसके इस्‍तेमाल के लिए मुलेठी की जड़ का पाउडर बनाकर इसे उबलते पानी में डालें। फिर ठंड़ा होने पर छान लें। इस चाय रुपी पानी को दिन में एक या दो बार पिएं।

►फीटकोंस्टीटूएंट्स की उपस्थिति के कारण, अलसी के बीज हार्मोंन को ब्‍लड में घूमने से रोकता है और लीवर के तनाव को कम करता है। टोस्‍ट पर, सलाद में या अनाज के साथ अलसी के बीज को पीसकर इस्‍तेमाल करने से लिवर के रोगों को दूर रखने में मदद करता है

►एवोकैडो और अखरोट को अपने आहार में शामिल कर आप लीवर की बीमारियों के आक्रमण से बच सकते हैं। एवोकैडो और अखरोट में मौजूद ग्लुटथायन, लिवर में जमा विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालकर इसकी सफाई करता है।

► पालक और गाजर का रस का मिश्रण लीवर सिरोसिस के लिए काफी लाभदायक घरेलू उपाय है। पालक का रस और गाजर के रस को बराबर भाग में मिलाकर पिएं। लीवर की मरम्मत के लिए इस प्राकृतिक रस को रोजाना कम से कम एक बार जरूर पिएं

►सेब और पत्तेदार सब्जियों में मौजूद पेक्टिन पाचन तंत्र में उपस्थित विषाक्त पदार्थों को बाहर निकाल कर लीवर की रक्षा करता है। इसके अलावा, हरी सब्जियां पित्त के प्रवाह को बढ़ाती हैं।

►एक पौधा और है जो अपने आप उग आता है , जिसकी पत्तियां आंवले जैसी होती है. इन्ही पत्तियों के नीचे की ओर छोटे छोटे फुल आते है जो बाद में छोटे छोटे आंवलों में बदल जाते है . इसे भुई आंवला कहते है. इस पौधे को भूमि आंवला या भू- धात्री भी कहा जाता है .

►यह पौधा लीवर के लिए बहुत उपयोगी है.इसका सम्पूर्ण भाग , जड़ समेत इस्तेमाल किया जा सकता है.तथा कई बाज़ीगर भुई आंवला के पत्ते चबाकर लोहे के ब्लेड तक को चबा जाते हैं . ये यकृत ( लीवर ) की यह सबसे अधिक प्रमाणिक औषधि है

Sunday, April 8, 2018

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Medical AssistantThe medical assistant field is an entry level position in the health care industry. Professionals employed as medical assistants provide both administrative and clinical assistance to their employers. Medical assistants are essential to the success of every health care agency. They take patient histories, prepare patients for examinations and routine laboratory procedures, perform simple procedures and manage and maintain patient records. The fundamental functions assigned to medical assistants allow physicians to concentrate their efforts on the more advanced skills and tasks without being delayed or set back by having to perform all of these essential tasks themselves.

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The Best Online Degrees for Careers Certain things about human nature are universal. No matter what changes, people will always enjoy taking some time off and letting someone else take care of them. And as long as people enjoy this,



MarketingThe competition for services and products is immense. Not only must businesses and contractors compete with comparable local businesses, but due to the globalization of the business world credited to the advent of the internet, they often compete with businesses across the state, nation and sometimes even the globe. Marketing professionals are necessary to help businesses and professionals attract customers and clients. Individuals with a degree in marketing are able to create effective marketing brochures, attractive displays and to direct them at target audiences based on statistics and research. Marketing professionals utilize a range of mediums to create interest in their products and services; from traditional print to more contemporary multimedia devices.

Online Master’s Degree in Project ManagementProject management is required in most business areas. Project Managers plan, budget, and coordinate the efforts of everyone involved with the project. Those with expertise in a specific field combined with strong academic credentials in management have opportunities in this increasingly important career field.

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The further we move into the digital age the more information we have to organize. This is all the more true of the healthcare profession, which is constantly being reinvented by an avalanche of new developments. And all the while new data is generated, the expectation that this information will be quickly and easily accessible, rises. Those who work in the health informatics profession are tasked both with organizing and utilizing this massive sea of data. They are also the ones responsible for keeping this sensitive material private.

Saturday, April 7, 2018

एलोवेरा के फायदे -Health Benefits of Aloe Vera in Hindi,

 
एलोवीरा के आयुर्वेदिक फायदे -Benefits Aloe Bera in Hindi


एलोवीरा को ग्वारपाठा भी कहा जाता है। साधारण सा दिखने वाला पौधा आपको कितना फायदा पहुंचा सकता है शायद आपने सोचा भी नहीं होगा। आयुर्वेद में एलोवीरा के एैसे गुणों का वर्णनन किया गया है जो अस्थमा, खांसी, गैस की समस्या, पथरी, सासों की समस्या जैसी कई बीमारीयों को ठीक कर सकता है।

इसके लिए आपको यह पता होना चाहिए कि एलोवीरा का सेवन किस तरह से किया जाए और कितनी मात्रा में। वैदिकवाटिका आपके लिए लाया है प्राचीन आयुर्वेद में छिपे एलोवीरा के अनोखे प्रयोग जो आपको बनाएंगे कई बीमारियों से मुक्त और स्वस्थ। एलोवीरा का पौधा कांटेदार होता है। जिसके किनारे पतले होते हैं।

एलोवेरा के फायदे

  • पीलिया रोग से ग्रसित रोगी के लिए एलोवीरा एक रामबाण औषधि है। 15 ग्राम एलोवेरा का रस सुबह शाम पीयें। आपको इस रोग में फायदा मिलेगा। मूत्र संबंधी रोग हो या गुर्दों की समस्या हो तो एलोवेरा आपको फायदा पहुंचाता है। एलोवेरा का गूदा या रस का सेवन करें।
  • एलोवेरा का गूदा चेहरे पर लगाने से चेहरा सुंदर और चमकदार बन जाता है। पुरूष हो चाहे स्त्री दोनों को एलोवेरा का पेस्ट चेहरे पर लगाना चाहिए। यह पूर्णरूप से प्राकृतिक क्रिम है। यदि सिर में दर्द हो तो आप हल्दी में 10 ग्राम एलोवेरा मिलाकर सिर पर इसका लेप लगाएं एैसा करने से सिर दर्द में राहत मिलती है। और ताजगी का अहसास होता है।
  • एलोवेरा मोटापा कम करने में फायदा करता है। 10 ग्राम एलोवेरा के रस में मेथी के ताजे पत्तों को पीसकर उसे मिलाकर प्रतिदिन सेवन करें या 20 ग्राम एलोवेरा के रस में 4 ग्राम गिलोय का चूर्ण मिलाकर 1 महिने तक सेवन करने से मोटापे से राहत मिलती है।
  • यह एक तरह का प्राकृतिक कंडीशनर है। एलोवेरा को बालों पर 20 मिनट तक उंगलियों के जरिए बालों पर लगाते रहें। और थोड़ी देर में पानी से बालों को धों लें। यह बालों को सुदंर, घना और आकर्षक बनाता है। चेहरे की झुर्रियों को दूर करने में आप एलोवेरा का गूदा कच्चे दूध के साथ मिलाकर चेहरे पर मलें। यह झुर्रियों को खत्म करके चेहरे कांतिमान बनाता है।
  • डायबिटीज की समस्या से परेशान हैं तो 10 ग्राम एलोवेरा के रस में 10 ग्राम करेले का रस मिलाकर कुछ दिनों तक सेवन करने से डायबिटीज से मुक्ति मिलती है। 20 ग्राम आंवले के रस में 10 ग्राम एलोवेरा के गूदे को मिलाकर प्रतिदिन सुबह सेवन करें। यह शूगर की बीमारी को दूर करेगा।
  • आग से शरीर का कोई अंग जल या झुलस गया हो तो आप एलोवेरा का गूदा उस जगह पर लगाएं आपको जलन से राहत मिलेगी और घाव भी जल्दी ठीक होगा।
  • सर्दी, जुकाम या खांसी होने पर शहद में 5 ग्राम एलोवेरा के ताजे रस में मिलाकर सेवन करें आपको फायदा होगा। शरीर में कैल्शियम की कमी हो तो एलोवेरा के गूदे का सेवन जरूर करें ।
  • बवासीर में यदि खून ज्यादा बहता हो तो एलोवेरा के पत्तों का सेवन 25-25 ग्राम की मात्रा में सुबह शाम करते रहें। बवासीर के मस्से खत्म करने के लिए एलोवेरा के गूदे में नीम की पत्तियों को जलाकर उसका राख मिला लें और इस पेस्ट को मलद्वार पर बांध लें।
  • खुजली, मुंहासों और फुंसी होने पर डेली 10 से 15 ग्राम एलोवेरा का रस पीना चाहिए यह खून को शु़द्ध करता है और चेहरे से मुंहासों को भी हटा देता है। दाद होने पर 10 ग्राम अनार के रस में 10 ग्राम एलोवेरा रस मिलाकर

सुंदर दिखने के आसान उपाय-Beauty Tips for Glowing Skin,Beauty Tips For Face in Hindi,

 
सुंदर दिखना हर किसी की चाहत होती है। इसके लिए जरूरी नहीं है कि आप मंहगे उत्पाद का प्रयोग करें या ब्यूटी पार्लर का रुख करें। चेहरे की खूबसूरती को निखारने के लिए जरूरी है कि आप इसका खास खयाल रखें। जानिए कुछ आसान उपाय जिनसे आपकी खूबसूरती बरकरार रहेगी। झुर्रियों करें दूर एक चम्मच शहद में कुछ बूंदे नींबू के रस की मिलाकर चेहरे पर लगाने से चेहरे पर झुर्रियाँ नहीं पड़ती है।चमक रखे बरकरारएक चम्मच गुलाबजल और एक चम्मच दूध के मिश्रण में दो तीन बूंद नींबू का रस मिलाकर इसे चेहरे पर लगाने से त्वचा की कोमलता व चमक बनी रहती है।

सुंदर दिखने के आसान उपाय-Beauty Tips for Glowing Skin,Beauty Tips For Face in Hindi,

  • सूखी हल्दी की गांठ को नींबू के रस में मिलाकर लगाने से भी दाग-धब्बे तेजी से मिटने लगते हैं। सूखी त्वचा के दाग-धब्बे मिटाने के लिए दूध में चंदन की लकड़ी घिसकर लगाएं।
  • तैलीय त्वचा के दाग-धब्बे मिटाने के लिए चंदन का बूरा गुलाब जल में मिलाकर लगाएं। यह प्रयोग हर मौसम में लाभकारी है। चोट के निशान पर लाल चंदन रोज पानी में घिस कर लगाएं 20 दिन में फायदा नजर आने लगेगा।
  • टमाटर में नींबू की दस-बारह बूंदे मिलाएं इस मिश्रण को चेहरे पर मलने से दाग-धब्बे दूर होते हैं। अक्सर पेट की खराबी से चेहरे पर दाग-धब्बे नजर आते हैं अत: दिन में कम से कम तीन बार नींबू पानी पिएं, कुछ ही हफ्तों में चेहरा चमकने लगेगा।
  • गुलाब जल को आइस ट्रे में जमाकर क्यूब्स को आंखों के इर्द-गिर्द घुमाने से आँखें तरोताजा तो होती हैं, उसकी जलन भी कम हो जाती है।
  • इसी तरह खीरे के रस का प्रयोग भी आँखों के लिए किया जा सकता है। साथ ही झुलसी त्वचा के लिए भी यह कारगर उपाय होगा।
  • एक चुटकी कपूर को शहद में मिलाकर चेहरा धोएं, चेहरा खिल जाएगा। साथ ही साबुन से चेहरा धोने के बाद गीले चेहरे पर चीनी और नमक लगाकर थोड़ी देर रखें और फिर उसे धो लें। यह चेहरे के लिए अच्छा स्क्रबर होगा।
  • यदि आप स्थाई तौर पर अपने चेहरे को बेदाग व खूबसूरत बनाना चाहते हैं तो इन आसान टिप्सों को आजमाइएँ - 
  • चेहरे पर हर रोज चंदन पावडर, गुलाब जल व हल्दी को मिलाकर इनका लेप लगाएँ। रोजाना यह लेप चेहरे पर लगाने से आपके चेहरे की रंगत निखरती है। 
  • ऐलोवेरा के पत्तों की ऊपरी परत निकालकर उसके गूदे को चेहरे पर मलने से धीरे-धीरे दाग-धब्बे कम होने लगते हैं। 
  • हर रोज त्वचा पर शहद लगाने से त्वचा के दाग-धब्बे कम पड़ने के साथ-साथ त्वचा का रूखापन भी दूर होता हैं। 
  • आप चाहे तो मौसमी फलों जैसे केला, संतरा, पपीता, आम आदि का गूदा अपने चेहरे पर लगा सकते हैं। फलों के पैक को लगाने से भी चेहरे के दाग-धब्बे मिटते हैं।

सफेद बालों से छुटकारा,-How to Make Hair black Naturally in Hindi,

 

कम उम्र में सफेद हुए बालों को काला करने के लिए 10 घरेलू उपचार कम उम्र में आई सफेदी को छुपाने के लिए डाई करना या कलर करना ही एकमात्र विकल्प नहीं है।कुछ घरेलू नुस्खे आजमा कर भी सफेद बालों को काला किया जा सकता है। हम आपको बताने जा रहे हैं कुछ ऐसे ही सिंपल घरेलू फंडे जिनसे आप कम उम्र में सफेद हुए बालों को फिर से काला बना सकते हैं

घरेलू उपचार-home remedies for black natural hair at homemade,

    • आंवला पाउडर में नींबू का रस मिलाकर या ताजे हरे आंवले को पीसकर सिर में लगाने से बाल घने व काले हो जाते हैं।
    • प्याज का रस निकालकर उसे बालों की जड़ों में हल्के हाथों से लगाएं बाल घने व काले होने लगेंगे।
    • नींबू का रस और नारियल तेल मिलाकर स्कल्प पर नियमित रूप से लगाने पर बाल काले होते हैं।
    • 200 ग्राम आंवला, 200 ग्राम भांगरा, 200 ग्राम मिश्री, 200 ग्राम काले तिल इन सभी का चूर्ण बनाकर रोजाना 10 ग्राम मात्रा में लेने से कम उम्र में सफेद हुए बाल फिर से काले होने लगेंगे।
    • 2 चम्मच हिना पाउडर, 1 चम्मच दही, 1 चम्मच मेथी, 3 चम्मच कॉफी, 2 चम्मच तुलसी पाउडर, 3 चम्मच पुदीना पेस्ट मिलाकर बालों में लगाएं। तीन घंटे बाद शैम्पू करें। कम उम्र में सफेद हुए बाल फिर काले हो जाएंगे।
    • सूखे आंवले को पानी में भिगोकर उसका पेस्ट बना लें। इस पेस्ट में एक चम्मच युकेलिप्टस का तेल मिलाएं। मिश्रण को एक रात तक लोहे के बर्तन में रखें। सुबह इसमें दही, नींबू का रस व अंडा मिलाकर बालों पर लगाएं। बालों में नई जान आ जाएगी। 15 दिन तक यह प्रयोग करने से सफेद बाल काले होने लगते हैं।
    • नारियल तेल में मीठे नीम की पत्तियां को इतना उबाले की पत्तियां काली हो जाएं। इस तेल के हल्के हाथों से बालों की जड़ों पर लगाएं। बाल घने व काले हो जाएंगे।
    • अदरक को पीसकर उसमें थोड़ा शहद मिलाकर पेस्ट बनाएं और अपने सिर पर लगाएं। इस उपाय को रोजाना अपनाने से सफेद बाल फिर से काले होने लगते हैं।
    • एक कप चाय का पानी उबालकर उसमें एक चम्मच नमक मिलाएं। इस मिश्रण को बाल धोने से एक घंटे पहले बालों में लगाएं। बाल काले होने लगेंगे।
    • तिल का तेल तो बालों के लिए अच्छा होता ही है। साथ ही, इसका सेवन भी बहुत लाभ पहुंचाता है। यदि आप अपने भोजन में तिल को शामिल कर लें तो आपके बाल लंबे समय तक काले और घने बने रहेंगे
    • रात के समय तुलसी के पत्तों को पीसकर और इसमें आंवले का चूर्ण मिलाकर पानी में भिगोने के लिए रख दें। सुबह के समय में इस पानी को छानकर इससे सिर को धो लें। ऐसा करने से कुछ ही दिनों में सफेद बाल काले हो जाते हैं।
    • आंवले के कुछ टुकड़ों को नारियल तेल में उबाल लें। तेल को इतना उबालें कि आंवले काले हो जाएं। इस तेल को रोजाना बालों में लगाने से सफेद बाल फिर से काले होने लगते हैं।
    • सूरजमुखी, खुबानी, गेहूं, अजमोद और पालक आदि लौह तत्वों से भरपूर चीजों का सेवन करें। केला, गाजर और मछली जैसे आयोडिन युक्त चीजें खाना भी फायदेमंद होता है। इसके अलावा, विटामिन बी5 और बी2 को भी अपने भोजन में शामिल कर लेना चाहिए।
    • अदरक को छीलकर मिक्सर में पीस लें। इसे छानकर रस निकाल लें। फिर अदरक के रस में शहद मिलाकर बालों की जड़ों में लगाएं। एक घंटे बाद बाल धो लें। लगातार यह उपाय करने से कम उम्र में सफेद हुए बाल फिर से काले हो जाएंगे।
    • नारियल तेल में नींबू का रस मिलाकर स्कल्प पर लगाएं। यह उपाय रोज करें, सफेद बाल काले होने लगेंगे।
    • हफ्ते में दो बार गाय के दूध से बनी छाछ को बालों की जड़ों में लगाएं। कम उम्र में बाल सफेद नहीं होंगे।
    • नारियल तेल में करी पत्ता उबालें, जब करी पत्ते काले हो जाएं तो तेल को ठंडा करके बोतल में भर लें। इस तेल को रोजाना बालों में लगाएं, लाभ होगा।
    • लौकी को सुखाकर नारियल तेल में उबाल लें। इस तेल को छानकर बोतल में भर लें। इस तेल की मसाज करने से बाल काले हो जाएंगे।
    • कच्चे प्याज को टुकड़े कर मिक्सर में पीस लें। इसका रस बालों की जड़ों में लगाएं। नियमित उपयोग से कम उम्र में सफेद हुुए बाल काले हो जाते हैं। साथ ही, बाल गिरने भी कम हो जाते हैं।
    • दो चम्मच मेहंदी पाउडर, एक चम्मच दही,1चम्मच मेथीदाना पाउडर, तीन चम्मच कॉफी, दो चम्मच तुलसी पाउडर के मिश्रण को बालों में लगाएंं और तीन घंटे बाद सिर धो लें।
    • आधा कप दही में एक ग्राम काली मिर्च और थोड़ा नींबू का रस मिलाकर बालों में लगाएं, फायदा होगा।
    • अमरूद की पत्तियों का पेस्ट बनाकर बालों में लगाएं, लाभ होगा।
    • बाल धोने से पहले बालों में ऐलोवेरा जेल की मसाज करें। बाल घने और काले हो जाएंगे।
    • 250 ग्राम सरसों के तेल में मेहंदी के पत्तों को उबालें। इस तेल को छानकर बोतल में भरकर रख लें। रोजाना रात को सोने से पहले बालों में लगाएं।
    • मेहंदी की पत्तियों में थोड़ा नींबू का रस मिलाकर पीस लें। इसमें एक चम्मच कॉफी पाउडर और एक अंडा मिलाएं। इस मिश्रण को बालों में लगाएं और 45 मिनट के बाद बाल धो लें।
    • ब्राह्मी की पत्तियों को पीसकर या इसका तेल बनाकर बालों में लगाएं, बाल काले होने लगेंगे।
    • तुरई को काटकर नारियल तेल में तब तक उबालें, जब तक वह काली न हो जाए। इस तेल को रोजाना बालों में लगाने से बाल काले हो जाते हैं।
    • आंवले के साथ आम की गुठली को पानी मिलाकर पीस लें। इस मिश्रण को बालों में लगाकर एक घंटे बाद बाल धो लें।
    • काली अखरोट को पानी में उबालकर उस पानी को ठंडा करके बाल धोएं। कम उम्र में सफेद हुए बाल फिर से काले हो जाएंगे।
    • बालों को हमेशा ठंडे और साफ पानी से धोएं।

      गिरते बालों के लिए घरेलू उपचार-Hair Fall Treatment at Home in Hindi,

       
      गिरते बालों के लिए घरेलू उपचार-Hair Fall Treatment at Home in Hindi,


      खूबसूरती में चार चांद लगाने के लिए सुंदर और घने बालों का होना जरूरी है। लेकिन बालों में उचित पोषण न मिलने के कारण वे समय से पहले ही गिरने लगते हैं।बालों की देखभाल सही तरह से न की जाये तो बाल गिरने शुरू हो जाते हैं। हालांकि सामान्‍यत: लोगों के बाल झड़ते हैं लेकिन सामान्‍य से ज्‍यादा बाल झड़ रहे हैं तो समझिए कि आप बालों की समस्‍या से गुजर रहे हैं। बाल झड़ने के पीछे कई कारण हो सकते है,जैसे तनाव, इन्फेक्शन, हार्मोन्स का असंतुलन, अपर्याप्त पोषण, विटामिन और पोषक पदार्थों की कमी,दवाओं के साइड इफेक्ट्स, लापरवाही बरतना या बालों की सही देखभाल न करना। घटिया साबुन और शैंपू का प्रयोग भी बालों के गिरने का कारण बनता है। 
      • गिरते बालों के लिए घरेलू नुस्‍खे –बालों का गिरना रोकने और बालों की वृद्धि के लिए सप्ताह में एक बार अपने बालों की रोज़मेरी ऑयल से मसाज कीजिए, इससे बाल मजबूत होते हैं।
      • जवाकुसुम की पत्तियों को थोड़े से पानी में मिलाकर पेस्ट बना लीजिए, इस पेस्‍ट को सिर की त्वचा और बालों पर लगाइए, इससे बाल बढ़ते हैं और घने भी होते हैं।
      • बालों को मजबूत बनाने और टूटने से बचाने के लिए बालों को भरपूर पोषण दीजिए। मेंहदी में भरपूर पोषण होता है जो बालों के लिए फायदेमंद है, इसलिए बालों में मेहंदी लगानी चाहिए।
      • मेंहदी को अंडे के साथ मिलाकर लगाने से ज्‍यादा फायदा होता है। इससे बाल मजबूत होते हैं और बालों का गिरना बंद हो जाता है।
      • गिरते बालों को रोकने के लिए दही बहुत कारगर घरेलू नुस्‍खा है। दही से बालों को पोषण मिलता है। इसके लिए बालों को धोने से कम से कम 30 मिनट पहले बालों में दही लगाना चाहिए। जब बाल पूरी तरह सूख जाएं तो पानी से धो लीजिए।
      • दही में नींबू का रस मिलाकर भी प्रयोग किया जा सकता है। नींबू के रस को दही में मिलाकर पेस्‍ट बना लीजिए। नहाने से पहले इस पेस्‍ट को बालों में लगाइए, 30 मिनट बाद बालों को धुल लीजिए। बालों का गिरना कम हो जाएगा।
      • बालों को धोने से एक घंटा पहले बालों में अंडे लगाइए, इससे बाल मजबूत होते हैं।
      • शहद कई बीमारियों को दूर करने में सक्षम है। शहद के प्रयोग से बालों का झडऩा भी रोका जा सकता है। शहद को बालों में लगाने से बालों का गिरना बंद हो जाता है।
      • दालचीनी भी बालों की समस्या को दूर करने का कारगर उपाय है। दालचीनी और शहद के को मिलाकर बालों में लगाइए। इससे बालों का झड़ना बंद होगा।
      • गरम जैतून के तेल में एक चम्मच शहद और एक चम्मच दालचीनी पाउडर मिलाकर उनका पेस्ट बनाइए। नहाने से पहले इस पेस्ट को सिर पर लगाइए और कुछ समय बाद सिर को धो लीजिए। इससे बालों का गिरना कम होगा
      • घी खाएं और बालों के जड़ों में घी मालिश करें।
      • गेहूं के जवारे का रस पीने से भी बाल कुछ समय बाद काले हो जाते हैं।
      • तुरई या तरोई के टुकड़े कर उसे धूप मे सूखा कर कूट लें। फिर कूटे हुए मिश्रण में इतना नारियल तेल डालें कि वह डूब जाएं। इस तरह चार दिन तक उसे तेल में डूबोकर रखें फिर उबालें और छान कर बोतल भर लें। इस तेल की मालिश करें। बाल काले होंगे।
      • नींबू के रस से सिर में मालिश करने से बालों का पकना, गिरना दूर हो जाता है। नींबू के रस में पिसा हुआ सूखा आंवला मिलाकर सफेद बालों पर लेप करने से बाल काले होते हैं।
      • बर्रे(पीली) का वह छत्ता जिसकी मक्खियाँ उड़ चुकी हो 25 ग्राम, 10-15 देसी गुड़हल के पत्ते,1/2 लीटर नारियल तेल में मंद मंद आग पर उबालें सिकते-सिकते जब छत्ता काला हो जाये तो तेल को अग्नि से हटा दें. ठंडा हो जाने पर छान कर तेल को शीशी में भर लें. प्रतिदिन सिर पर इसकी हल्के हाथ से मालिश करने से बाल उग जाते हैं और गंजापन दूर होता है.
      • कुछ दिनों तक, नहाने से पहले रोजाना सिर में प्याज का पेस्ट लगाएं। बाल सफेद से काले होने लगेंगे।
      • नीबू के रस में आंवला पाउडर मिलाकर सिर पर लगाने से सफेद बाल काले हो जाते हैं।
      • तिल का तेल भी बालों को काला करने में कारगर है।
      • आधा कप दही में चुटकी भर काली मिर्च और चम्मच भर नींबू रस मिलाकर बालों में लगाए। 15 मिनट बाद बाल धो लें। बाल सफेद से काले होने लगेंगे।
      • नीम का पेस्ट सिर में कुछ देर लगाए रखें। फिर बाल धो लें। बाल झड़ना बंद हो जाएगा।
      • चाय पत्ती के उबले पानी से बाल धोएं। बाल कम गिरेंगे।
      • बेसन मिला दूध या दही के घोल से बालों को धोएं। फायदा होगा।
      • दस मिनट का कच्चे पपीता का पेस्ट सिर में लगाएं। बाल नहीं झड़ेंगे और डेंड्रफ (रूसी) भी नहीं होगी।
      • 250 ग्राम अमरबेल को लगभग 3 लीटर पानी में उबालें। जब पानी आधा रह जाये तो इसे उतार लें। सुबह इससे बालों को धोयें। इससे बाल लंबे होते हैं।
      • 50 ग्राम कलौंजी 1 लीटर पानी में उबाल लें। इस उबले हुए पानी से बालों को धोएं। इससे बाल 1 महीने में ही काफी लंबे हो जाते हैं।
      • नीम और बेर के पत्तो को पानी के साथ पीसकर सिर पर लगा लें और इसके 2-3 घण्टों के बाद बालों को धो डालें। इससे बालों का झड़ना कम हो जाता है और बाल लंबे भी होते हैं।
      • लहसुन का रस निकालकर सिर में लगाने से बाल उग आते हैं।
      • सीताफल के बीज और बेर के बीज के पत्ते बराबर मात्रा में लेकर पीसकर बालों की जड़ों में लगाएं। ऐसा करने से बाल लंबे हो जाते हैं।
      • 10 ग्राम आम की गिरी को आंवले के रस में पीसकर बालों में लगाना चाहिए। इससे बाल लंबे और घुंघराले हो जाते हैं।
      • शिकाकाई और सूखे आंवले को 25-25 ग्राम लेकर थोड़ा-सा कूटकर इसके टुकड़े कर लें। इन टुकड़ों को 500 ग्राम पानी में रात को डालकर भिगो दें। सुबह इस पानी को कपड़े के साथ मसलकर छान लें और इससे सिर की मालिश करें। 10-20 मिनट बाद नहा लें। इस तरह शिकाकाई और आंवलों के पानी से सिर को धोकर और बालों के सूखने पर नारियल का तेल लगाने से बाल लंबे, मुलायम और चमकदार बन जाते हैं
      • ककड़ी में सिलिकन और सल्फर अधिक मात्रा में होता है जो बालों को बढ़ाते हैं। ककड़ी के रस से बालों को धोने से तथा ककड़ी, गाजर और पालक सबको मिलाकर रस पीने से बाल बढ़ते हैं। यदि यह सब उपलब्ध न हो तो जो भी मिले उसका रस मिलाकर पी लें। इस प्रयोग से नाखून गिरना भी बन्द हो जाता है।
      • कपूर कचरी 100 ग्राम, नागरमोथा 100 ग्राम, कपूर तथा रीठे के फल की गिरी 40-40 ग्राम, शिकाकाई 250 ग्राम और आंवले 200 ग्राम की मात्रा में लेकर सभी का चूर्ण तैयार कर लें। इस मिश्रण के 50 ग्राम चूर्ण में पानी मिलाकर लुग्दी(लेप) बनाकर बालों में लगाना चाहिए। इसके पश्चात् बालों को गरम पानी से खूब साफ कर लें। इससे सिर के अन्दर की जूं-लींकें मर जाती हैं और बाल मुलायम हो जाते हैं।
      • गुड़हल के फूलों के रस को निकालकर सिर में डालने से बाल बढ़ते हैं गुड़हल के ताजे फूलों के रस में जैतून का तेल बराबर मिलाकर आग पर पकायें, जब जल का अंश उड़ जाये तो इसे शीशी में भरकर रख लें। रोजाना नहाने के बाद इसे बालों की जड़ों में मल-मलकर लगाना चाहिए। इससे बाल चमकीले होकर लंबे हो जाते हैं।
      • बालों को छोटा करके उस स्थान पर जहां पर बाल न हों भांगरा के पत्तों के रस से मालिश करने से कुछ ही दिनों में अच्छे काले बाल निकलते हैं जिनके बाल टूटते हैं या दो मुंहे हो जाते हैं।
      • त्रिफला के चूर्ण को भांगरा के रस में 3 उबाल देकर अच्छी तरह से सुखाकर खरल यानी पीसकर रख लें। इसे प्रतिदिन सुबह के समय लगभग 2 ग्राम तक सेवन करने से बालों का सफेद होना बन्द जाता है तथा

      पुरुषों के लिए ब्यूटी टिप्स-Beauty Tips for Men in Hindi,

       
      सुंदर दिखने की चाह केवल महिलाओं में ही नहीं होती, पुरुष भी चाहते हैं कि वे खूबसूरत नजर आएं। अब वो दौर नहीं है जब रफ एंड टफ रहना ही पुरुषों की पहचान होता है। आज बाजार में पुरुषों को खूबसूरत बनाने के ढेरों उत्पाद मौजूद हैं। सिर्फ शेव करने से ही चेहरा चमकाने का जमाना अब चला गया है आज दौर है 'हाय हैंडसम' और 'नंबर वन' नजर आने का। 

      शरीर को पसीने की गन्ध से बचाने के लिए डिओडरेंट का इस्तेमाल किया जाता है.बहुत से पुरुष हर बार अलग अलग खुशबु वाले डिओडरेंट या परफ्यूम का इस्तेमाल करते हैं. हमारी सलाह यह है कि आप हमेशा एक या दो तरह की खुशबु का इस्तेमाल करें ताकि आपकी खुशबु सही लोगों को पता चल जाए की आप आये हैं.

      तो आइए जानते हैं पुरुषों के लिए अपनी खूबसूरती निखारने के कुछ टिप्स।

      ब्यूटी टिप्स

      मॉश्चराइजर है जरूरी
      अपने चेहरे को रोज क्लीन और मॉश्चराइजर करें। अगर आपकी त्वचा तैलीय है तो सोप-फ्री क्लींजर का इस्तेमाल करें। आप ऑयल कंट्रोल फेस वॉश का इस्तेमाल भी कर सकते हैं।

      स्केर्ब से हटाएं मृत त्वचा
      डेड स्किन, ब्लैक हैड्स और व्हाइट हैड्स रिमूव करने के लिए हफ्ते में कम से कम दो बार स्कर्ब करें। इससे चेहरे पर निखार तो आएगा साथ ही त्वचा भी जवां रहेगी।

      सनस्क्रीन बने सेहत की छतरी
      पुरूषों की त्वचा के लिए भी अल्ट्रा-वॉयलेट किरणें उतनी ही हानिकारक होती हैं, जितनी महिलाओं के लिए, इसलिए आप जब भी बाहर जाएं तो सनस्क्रीन लोशन लगा कर जाएं। धूप में जाने से कम से कम 20 मिनट पहले सनस्क्रीन लोशन लगाएं। साथ ही माश्चराइजर के रूप में एलोवेरा जैल का इस्तेमाल किया जा सकता है।
      पूरी बांह के कपड़े हैं फायदेमंद
      त्वचा को नुकसान और स्किन टैन न हो इसलिए गर्मियों में और तेज धूप में जाते समय हमेशा पूरी बांह की कोटन की शर्ट पहनें।

      धूम्रपान को कहें न
      सिगरेट आपकी सेहत के लिए बहुत नुकसानदेह होती है। सिगरेट पीने से सेहत पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों का असर चेहरे पर भी साफ नजर आता है। साथ ही सिगरेट से चेहरे पर झुर्रियां पड़ने लगती हैं और होंठ भी काले हो जाते हैं।

      फेशियल से चमकेगा चेहरा
      चेहरे की चमक को बनाए रखने के लिए पुरूष भी महीने में एक बार फेशियल करवा सकते है, महिलाओं की तरह। खास मौकों पर गोल्ड या पर्ल फेशियल ही कराएं।

      शेव करने से पहले ध्यान दें
      पुरूषों को कई बार शेव करने में ज्यादा दिक्कत होती है क्योकि उनकी त्वचा हार्ड होती है। इसलिए शेव करने से पहले नींबू का रस या शेविंग जेल लगाएं। इससे शेव आसानी से बन जाती है और साथ ही इस बात का भी ध्यान रखें कि फोम का ज्यादा इस्तेमाल त्वचा को नुकसान पहुंचाता है।

      पिंपल से मिलेगा छुटकारा
      अगर आपके फेस पर पिंपल्स हैं तो नींबू और मुल्तानी मिट्टी को मिक्स करके लगाएं और साथ ही साथ काली मिर्च में शहद मिलाकर लगाने से भी फायदा होगा।

      दाग धब्बे यूं हटाएं
      चेहरे पर झाइयां और दाग-धब्बे हैं तो इन्हें हटाने के लिए बेसन में मौसमी का जूस मिलाकर लगाने से फायदा होगा।

      आटा का यह इस्तेमाल देखा है कभी
      चेहरे की त्वचा को चिकनी और कोमल बनाए रखने के लिए जौ के आटे को फेस पैक के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं क्योंकि यह कुदरती तौर पर त्वचा को कोमल, गोरा और चमकदार बनाता है।

      टमाटर नींबू है उपयोगी
      अगर आपकी त्वचा तैलीय है तो टमाटर और नींबू का फेस पैक लगाए। इसके लिए एक टमाटर और नींबू का रस मिलाकर ऑखों के हिस्से को छोड़कर पूरे चेहरे पर लगाऍ।

      Monday, April 2, 2018

      जैतून के तेल के फायदे,Benefits of Olive Oil in Hindi,

       
      जैतून के तेल के फायदे,Benefits of Olive Oil in Hindi,
      जैतून का तेल ( Olive Oil) एक बेहद लाभकारी तेल है | इसे जैतून के फल से निकाला जाता है | इसके अनगिनत लाभ हैं | यह स्वास्थ्यवर्धक है, जैतून का तेल जिसे हम ऑलिव ऑयल भी कहते है। यह तेल हमारे शरीर को कई रोगों से राहत दिलवाता है। जैतून का तेल हमारी सुंदरता बढ़ाने के साथ-साथ हमें ओर भी कई समस्याओं जैसे बालों और त्वचा सम्बन्धी समस्याओं से राहत दिलवाता है। जैतून के तेल का प्रयोग खाना पकाने में, सौंदर्य सामग्री और दवाओं में तेल के रूप में प्रयोग किया जाता है।

      जैतून के तेल के फायदे,Benefits of Olive Oil in Hindi,

      • जैतून ऑस्टेरोपिरोसिस में भी लाभकारी है। यह बोन मिनरल्स को इम्प्रूव करके उनमे कैल्शियम को स्टोर करता है।
      • डिप्रेशन के शिकार लोगों को भी ऑलिव का इस्तेमाल करना चाहिए। खाना बनाने में इसके तेल का इस्तेमाल करें। 
      • जैतून के तेल से चेहरे पर मसाज करने से चेहरे में चमक और झुर्रियों से भी राहत मिलती है।
      • जैतून के तेल का प्रयोग हम शरीर पर मालिश करने के लिए भी करते है ,यें त्वचा को कोमल बनाएं रखने में मदद करता है।
      • जैतून के तेल का प्रयोग पैरों के लिए भी लाभकारी होता है,पैरों को कोमल बनाएं रखने में मदद करता है।
      • जैतून के तेल से आंखों के आसपास मसाज करने से आंखों के काले घेरों से छुटकारा मिलता है।
      • जैतून के तेल का प्रयोग भोजन में करने से हड्डियां मजबूत बनती है।
      • जैतून के तेल का सेवन करने से हृदय संबधी रोगों से निजात मिलती है।
      • ऑलिव त्वचा के कैंसर से भी बचाता है। हेल्दी नेल्स- नेल्स को ऑलिव ऑयल में आधे घण्टे तक डुबोकर रखे। इससे नेल्स सॉफ्ट और चमकदार बनेगे।
      • हेल्दी लिप्स- फ़टे और रूखे लिप्स पर ऑलिव ऑयल से 5 मिंनट तक मसाज करे। इससे लिप्स सॉफ्ट और हेल्दी बनेगी।
      • ब्लैक हेड्स- नहाने के बाद एक चम्मच ऑलिव ऑयल को चेहरे पर लगाएं। ब्लैक हेड्स की प्रॉब्लम दूर होगी।
      • कैंसर- जैतून के तेल में एंटी-ऑक्सीडेंट की मात्रा भी काफी होती है। इसमें विटामिन ए, डी, ई, के और बी-कैरोटिन की मात्रा अधिक होती है। इससे कैंसर से लड़ने में आसानी होती है। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में किए गए एक शोध के अनुसार जैतून का तेल आंत में होने वाले कैंसर से बचाव करने में अहम भूमिका निभाता है। इसके अलावा यह रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद करता है। 
      • ऑस्टियोपोरोसिस- जैतून के तेल में कैल्शि‍यम की काफी मात्रा पाई जाती है, इसलिए भोजन में इसका उपयोग या अन्य तरीकों से इसे आहार में लेने से ऑस्टियोपोरोसिस जैसी समस्याओं से निजात मिलती है। 
      • मोटापा- लंबे समय तक जैतून के तेल को आहार में शामिल करने पर यह शरीर में मौजूद वसा को खुद ब खुद कम करने लगता है। इससे आपका मोटापा कम होता है, वह भी हेल्दी तरीके से।
      • मेकअप रिमूवर- जैतून के तेल को मेकअप रिमूवर के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता है। इसके प्रयोग से त्वचा रूखी भी नहीं होती और त्वचा का रंग गोरा होता है। यह त्वचा को पोषण प्रदान करता है।
      • धूप से झुलसी त्वचा को ठीक करने के लिए जैतून का तेल बहुत प्रभावी है।
      • नहाने के बाद ऑलिव ऑयल लगाने से शरीर पर मौजूद काले धब्बे दूर हो जाते हैं और पूरे दिन आपके शरीर पर नमी बनी रहती है। 
      • जैतून का तेल चेहरे और गर्दन पर लगाएं। इससे चेहरे पर रौनक आ जाएगी और गर्दन का कालापन दूर हो जाएगा।
      • ऑलिव ऑयल में चीनी मिलाकर रोज स्क्रब करने से काली त्वचा की समस्या से काफी हद तक निजात मिलती है।
      • जैतून के तेल से सिर पर मालिश करने से बाल मुलायम हो जाते है। बालों की समस्याओं से छुटकारा पाया जा सकता है।जैतून के तेल का सेवन करने से कब्ज से राहत मिलती है।
      • जैतून के तेल और चीनी का प्रयोग करके हम चेहरे पर स्क्रब भी कर सकते है।
      • जैतून के तेल का प्रयोग हम फेसपैक में भी कर सकते है।
      • जैतून का तेल त्वचा के अंदर गहराई से जा कर त्वचा को पोषण प्रदान करता है।
      • जैतून के तेल का प्रयोग खाना पकाने में,सौंदर्य सामग्री और दवाओं में तेल के रूप में किया जाता है।
      • सलाद को और भी पौष्टिक बनाने के लिए उसके ऊपर ऑलिव ऑयल डालकर खाना चाहिए।
      • कई तरह के कैंसर से बचाने में भी जैतून सहायक है।*. आँखों को स्वस्थ रखने में ऑलिव बेहद लाभकारी है।
      • ऑलिव के सेवन से खून में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा घटती है।ऑलिव ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखता है।
      • ऑलिव अल्जाइमर जैसी बीमारी के प्रभाव को कम करता है। 

      Friday, March 30, 2018

      हाइड्रोसील के उपचार,Hydrocele Treatment in Hindi

       
      Hydrocele Treatment in Hindi
      इस रोग में रोगी के अण्डकोषों में पानी भर जाता है जिसके कारण उसके अण्डकोष में सूजन आ जाती हैं। जब यह रोग किसी व्यक्ति को होता है तो उसके केवल एक ही तरफ के अण्डकोष में पानी भरता है। इस रोग का इलाज प्राकृतिक चिकित्सा से किया जा सकता है। कुछ लोगों में हाइड्रोसील की समस्‍या वंशानुगत या जन्मजात भी हो सकती है। जन्मजात हाइड्रोसील नवजात बच्चे में होता है और जन्‍म पहले वर्ष में समाप्त हो सकता है। वैसे तो यह समस्‍या किसी भी उम्र में हो सकती है लेकिन 40 वर्ष के बाद इसकी शिकायत अक्‍सर देखी जाती है। कभी-कभी अंडकोष की सूजन में दर्द बिल्कुल भी नही होता और कभी होता है और वह बढ़ता रहता है।

      अण्डकोषों में पानी भर जाने का लक्षण ,Symptoms,

      प्राकृतिक चिकित्सा के अनुसार इस रोग के कारण रोगी व्यक्ति के अण्डकोषों में दर्द होने लगता है। रोगी के अण्डकोष का एक भाग सूज जाता है, कभी-कभी तो ये इतने बढ़ जाते है कि व्यक्ति को चलने फिरने में दिक्कत होने लगती है। यदि रोगी व्यक्ति के अंडकोष में सूजन के साथ तेज दर्द होने लगता है तो समझना चाहिए कि रोगी व्यक्ति को हाइड्रोसील अण्डकोषों में पानी भर जाने का रोग हो गया है। जब यह रोग धीरे-धीरे बढ़ता है तो इसके कारण जननेन्द्रिय की सारी नसें कमजोर और ढीली पड़ जाती हैं जिसके कारण रोगी व्यक्ति को उल्टी तथा मितली भी होने लगती है और कब्ज भी रहने लगती है।

      अंडकोष की जांच,Examining testicles,

      • अक्सर, आसपास के तरल पदार्थ की वजह से अंडकोष को महसूस नहीं किया जा सकता।
      • हाइड्रोसील में तरल पदार्थ का आकार पेट या अंडकोश की थैली के दबाव की वजह से कम या ज्यादा होता जाता है।
      • अगर शरीर में द्रव के संग्रह का आकार बदलता रहता है, तो यह अधिकतम वक्षण हर्निया के साथ जुड़े होने की संभावना भी होती है।
      • हाइड्रोसील को आसानी से पहचाना जा सकता है।
      • इसके निदान के लिए अल्‍ट्रासाउंड तकनीक भी प्रयोग कर सकते हैं। अल्‍ट्रासाउंड से अंडकोष में भरा द्रव साफ नजर आता है।

      अण्डकोषों में पानी भर जाने का कारण, Causes of Hydrocele

      • प्राकृतिक चिकित्सा के अनुसार यह रोग किसी व्यक्ति को यौन अंगों में विजातीय द्रव्यों (दूषित मल) के इकट्ठा हो जाने के कारण होता है।
      • गलत तरीके से खान-पान की आदतें तथा समय पर खाना न खाने के कारण यह रोग व्यक्ति को हो जाता है।
      • अंडकोष पर चोट
      • नसों का सूजना
      • स्वास्थ्य समस्यायें
      • बिना लंगोट के जिम / कसरत करना
      • दूषित मल के इक्कठा होने
      • अन्य रोग जो दवा से दबाए गए हो या फिर संभोग सबंधी उत्तेजना को एक दम से रोक देने के कारण भी यह रोग हो जाता है।
      • मल-मूत्र के वेग को रोकने के कारण भी यह रोग हो सकता है।
      • भारी वजन उठाने, अधिक पैदल चलने, अंगों को तोड़ने या अंगड़ाई लेने के कारण भी यह रोग हो सकता है।
      • संभोगक्रिया अधिक करने के कारण भी कभी-कभी अण्डकोषों में पानी भर जाता है।

      प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार,Hydrocele Treatment in Hindi,

      • इस रोग का प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार करने के लिए रोगी व्यक्ति को कम से कम 2 सप्ताह तक प्रतिदिन संतरे का रस या अनार का रस पीना चाहिए। रोगी को कच्चे सलाद में नींबू डालकर सेवन करना चाहिए और उपवास रखना चाहिए।
      • इस रोग को ठीक करने के लिए पीले रंग की बोतल का सूर्यतप्त जल 25 मिलीलीटर की मात्रा में प्रतिदिन 4 बार सेवन करना चाहिए तथा इस जल का सेवन करने से पहले रोगी व्यक्ति को एक घण्टे तक लाल प्रकाश और उसके बाद कम से कम 2 घण्टे तक नीला प्रकाश अण्डकोष पर डालना चाहिए। जिसके फलस्वरूप यह रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है।
      • रोगी व्यक्ति को कटिस्नान, मेहनस्नान, सूखा घर्षण, गर्म एवं नमक स्नान (नमक मिले पानी से स्नान) करना चाहिए। इससे यह रोग जल्दी ही ठीक हो जाता है।
      • इस रोग से पीड़ित रोगी को खुली हवा में व्यायाम करना चाहिए तथा इसके साथ सूर्य स्नान भी करना चाहिए। इस प्रकार से रोगी का इलाज प्राकृतिक चिकित्सा से करने से रोग बहुत जल्दी ही ठीक हो जाता है।
      • पांच ग्राम काली मिर्च और दस ग्राम जीरे का चूर्ण आपस में मिलाके एक पेस्ट बनाए और इस पेस्ट को गर्म करे फिर इस पेस्ट में आप इतना गर्म पानी मिलाये कि एक पतला घोल बन जाए अब इस घोल को बढे हुए अंडकोषों पर लेप करके सो जाए इस प्रकार तीन-चार दिनों तक करने से फायदा दिखेगा जब तक पूर्ण आराम न हो करे-
      • रोगी व्यक्ति को कटिस्नान, मेहनस्नान, सूखा घर्षण, गर्म एवं नमक स्नान (नमक मिले पानी से स्नान) करना चाहिए। इससे यह रोग जल्दी ही ठीक हो जाता है।
      • इस रोग से पीड़ित रोगी को खुली हवा में व्यायाम करना चाहिए तथा इसके साथ सूर्य स्नान भी करना चाहिए। इस प्रकार से रोगी का इलाज प्राकृतिक चिकित्सा से करने से रोग बहुत जल्दी ही ठीक हो जाता है।
      • इस रोग को ठीक करने के लिए पीले रंग की बोतल का सूर्यतप्त जल 25 मिलीलीटर की मात्रा में प्रतिदिन 4 बार सेवन करना चाहिए तथा इस जल का सेवन करने से पहले रोगी व्यक्ति को एक घण्टे तक लाल प्रकाश और उसके बाद कम से कम 2 घण्टे तक नीला प्रकाश अण्डकोष पर डालना चाहिए। जिसके फलस्वरूप यह रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है।